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मैमथ की वापसी के तर्क

यह पिछले साल की बात है, उत्तरी साइबेरिया के द्वीप पर हिम युग के हाथी जैसे झबरे बालों वाले विशाल प्राणी मैमथ का पूरी तरह संरक्षित शरीर मिला। यह मई की बात है और उस समय उस जगह का तापमान था माइनस दस डिग्री सेंटीग्रेड। मैमथ को निकालने वाली टीम ने जब वहां जमी बर्फ को काटना शुरू किया, तो गाढ़े लाल-भूरे रंग की एक धारा निकलती दिखाई दी, यह खून की तरह लग रहा था। ऐसा पहले किसी ने नहीं देखा था और उम्मीदें अचानक  ही आसमान पर पहुंचने लगीं। बहुत से लोग इसमें मैमथ की क्लोनिंग की संभावनाएं देखने लगे। मैमथ को धरती पर फिर से हकीकत बनाने की यह बात अब भी चल रही है।

यह कहा जा सकता है कि अभी यह दूर की कौड़ी है, इसलिए इस पर बात करना बेकार है, लेकिन दो अलग-अलग तरह की सोच वाले संगठन इसके लिए सक्रिय हैं। दक्षिण कोरिया की सूआम और अमेरिका की जॉर्ज चर्च प्रयोगशाला क्लोनिंग के सिद्धांत को हकीकत में बदलने में जुटी हुई हैं। और अब जब उनकी कोशिशें तेजी पकड़ रही हैं, तो क्लोनिंग की नैतिकता पर बात करना हमारे लिए जरूरी हो जाता है।

मैं लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में पेलियोबायोलॉजिस्ट हूं और मैं जागते-सोते यहां तक कि सपने में भी मैमथ के बारे में ही सोचती हूं। एक जिंदा मैमथ को देखने की जितनी इच्छी मेरी है, शायद ही दुनिया में किसी और की हो। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि मैमथ की क्लोनिंग नैतिक रूप से गलत होगी।

मैमथ की क्लोनिंग के लिए एक हथिनी की जरूरत होगी, जो शायद कोई एशियाई हथिनी ही होगी। फिर इसकी कोख में मैमथ के भ्रूण को प्रत्यारोपित किया जाएगा। 22 महीने की इस गर्भावस्था में वहां एक बिलकुल ही अलग प्रजाति का बच्चा पलेगा। हाथी एक समझदार सामाजिक प्राणी है और लगातार लुप्त होता जा रहा है। हमें यह भी पता है कि पालतू हाथियों में प्रजनन बहुत अच्छा नहीं होता। और फिर एक हथिनी से काम भी नहीं चलेगा। मैमथ का पहला बच्चा पैदा हो, इसके पहले हमें ऐसी कई किराये की कोख चाहिए होंगी।

वैज्ञानिक शोध में जानवरों के इस्तेमाल के बहुत से वाजिब कारण गिनाए जाते हैं। लेकिन इसके लिए बहुत से कड़े नैतिक नियम-कायदे हैं, जो यह कहते हैं कि ऐसे शोध का संभावित फायदा पशु को होने वाली पीड़ा से कई गुना बड़ा होना चाहिए। तो क्या मैमथ की क्लोनिंग से होने वाले फायदा इसकी मां बनी एशियाई हथिनी को होने वाली पीड़ा से बहुत बड़ा होगा? मुझे अभी तक इसका कोई बहुत अच्छा तर्क नहीं सुनाई दिया। तो फिर हमें मैमथ को क्यों क्लोन करना चाहिए? क्या सिर्फ इसलिए कि यह देखने में बहुत अच्छा लगता है? यह तो कोई बात नहीं हुई।

या सिर्फ इसलिए कि तकनीक ने काफी तरक्की कर ली है और इंसान का ज्ञान भी काफी बढ़ चुका है? ठीक है, लेकिन फिर मैमथ ही क्यों? क्यों नहीं हम लुप्त हो चुके ऐसे किसी प्राणी को फिर से जीवित करने की कोशिश करते, जिसके लिए किराये की कोख की भी जरूरत न पड़े। जार्ज चर्च के लोग कबूतर की एक किस्म का क्लोन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और यह काम एक अंडे के इस्तेमाल से हो सकता है। बेशक, स्तनपायी प्राणियों के मामले में यह संभव नहीं है। तो क्यों नहीं किसी चूहे से यह शुरुआत की जाए? लेकिन क्लोनिंग के लिए किसी लुप्तप्राय चूहे की बात दिमाग में क्यों नहीं आती? क्यों नहीं हम विज्ञान की इस तरक्की का इस्तेमाल हाथी के प्रजनन विज्ञान को समझने में करते। एशियाई हाथी वैसे ही लुप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। हम ऐसे शोध बहुत सारे जीवित प्राणियों के मामले में कर सकते हैं। और अगर कारण सिर्फ यह है कि मैमथ की क्लोनिंग के नाम पर फंड जुटाना ज्यादा आसान है, तो इसका अर्थ है कि वह समय आ गया है, जब हमें अपनी प्राथमिकताओं के बारे में फिर से सोचना चाहिए।

एक सोच यह है कि अगर हम झबरे बालों वाले मैमथ को वापस लाते हैं, तो हम आर्कटिक के टुंड्रा इलाके में हिम युग के पर्यावरण को बहाल कर सकेंगे। दूसरी सोच यह है कि इससे उस इलाके में जमा मीथेन गैस की भारी मात्रा पर्यावरण में पहुंच जाएगी, जो ग्लोबल वार्मिग से परेशान दुनिया के लिए बुरी खबर होगी। समस्या यह है कि पर्यावरण के इंजीनियर के रूप में मैमथ क्या भूमिका निभा सकता है, इसे हम पूरी तरह जानते ही नहीं। हमें यह भी नहीं पता कि हिम युग खत्म होने के साथ ही मैमथ पूरी तरह लुप्त क्यों हो गए। इसलिए पर्यावरण के लिहाज से मैमथ को दोबारा धरती पर लाना एक बहुत बड़ा जुआ है। फिर यह भी है कि अगर इसका वाकई कोई असर होता हो, तो हमें ऐसे हजारों मैमथ जरूरी पड़ेंगे। इसके लिए बहुत लंबे समय और बहुत सारी हथिनियों की जरूरत पड़ेगी। लेकिन जिस तरह से पर्यावरण बदल रहा है, क्या हमारे पास इतना समय है?
हो सकता है कि इससे मैमथ क्लोन करने वाले को बहुत सारा पैसा और बहुत सारे पेटेंट मिल जाएं। इस हिसाब से इसे आर्थिक तौर पर उचित ठहराया जा सकता है, लेकिन इसे नैतिक तौर पर उचित ठहराने के लिए कुछ नहीं है। कुछ लोग, जो इस क्लोनिंग की हिमायत कर रहे हैं, इसे दूसरी तरह से देख रहे हैं। वे मानते हैं कि मैमथ को वापस लाकर वे उन ज्यादतियों के खत्म होने की  उम्मीद जगा सकते हैं, जो मानव जाति ने इस पर्यावरण पर की हैं। कभी-कभी जब मैं हिम युग के बारे में सोचती हूं, तो मुझे लगता है कि हमने क्या खो दिया? वे प्राणी अब हमें फिर कभी नहीं दिखेंगे। लेकिन इसमें एक विडंबना भी है। जब हम मैमथ के बारे में इस तरह से सोचते हैं, तो जरा यह भी सोचिए कि हमारी आने वाली पीढ़ियां हाथी के बारे में क्या सोचेंगी, अगर हमने इसे लुप्त होने दिया। दरअसल, हमें सारा ध्यान हाथियों को बचाने पर देना चाहिए, वह सब कुछ करना चाहिए, जिससे हम हाथी को लुप्त होने से बचा सकें।
साभार: द गार्जियन (ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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