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सांकेतिक यात्राएं

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संक्षिप्त यात्रा फिजी के लिए ऐतिहासिक और अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री रेअर एडमिरल (रिटायर्ड) वॉरेक बैनिमरामा ने इसी हफ्ते कहा था कि ‘यह फिजी के सबसे महत्वपूर्ण सप्ताहों में एक है।’ यह सप्ताह एक और नेता, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन का गवाह बनेगा, जो शुक्रवार को फिजी पहुंचने वाले हैं। साफ है, हम उन दो बड़ी शख्सियतों की मेजबानी कर रहे हैं, जो दुनिया के दो ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से समृद्ध देश के कर्णधार हैं। ये उन देशों को चला रहे हैं, जिनकी आबादी अरबों में है। इसमें कोई दोराय नहीं कि उच्च-स्तरीय वार्ताओं से हमारे छोटे से देश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस क्षेत्र में फिजी की भू-रणनीतिक स्थिति को देखते हुए और यह भी कि इन दो नेताओं ने ऑस्ट्रेलिया में जी-20 की प्रतिबद्धताओं के बाद यहां की यात्रा का कार्यक्रम बनाया, हमारे लिए यह महत्वपूर्ण अवसर हो जाता है। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी भारत के दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो फिजी के दौरे पर आए। इससे पहले, 1981 में इंदिरा गांधी फिजी की यात्रा पर आई थीं। नरेंद्र मोदी ने ऑन-रिकॉर्ड कहा है कि फिजी और अन्य प्रशांत महासागरीय देशों के साथ भारत सुदृढ़ सहयोग और तालमेल का भविष्य चाहता है। चीन भी कमोबेश यही सोचता है। लेकिन यह भी सच है कि इस क्षेत्र में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे कम करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, फिजी का औसत नागरिक अपने रोजमर्रा की चीजों को ज्यादा तवज्जो देता है, क्योंकि यही जीने के लिए जरूरी है। जिंदगी का यह भी एक सच है। लेकिन जनता राष्ट्रीय हितों के साथ भी है। भारत और चीन क्षेत्रीय देशों के साथ रिश्ते के महत्व को समझते हैं। जब मामला आर्थिक विकास और द्विपक्षीय कारोबार का हो, तो दोनों ही महारथी हैं। हम अपनी गतिविधियों से कैसे भारत और चीन के साथ अपने रिश्ते मजबूत बनाते हैं तथा वैश्विक समुदाय में एक राष्ट्र के तौर पर हमारे लिए क्या मतलब है, ये दोनों सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। आने वाले समय में बड़ी उम्मीद और बड़ी हित के साथ दुनिया हमसे इनके जवाब चाहेगी।   
द फिजी टाइम्स, फिजी

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