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भाषण में ही दिख गई कई छात्र नेताओं की ‘दक्षता’

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनने के लिए चुनाव में उतरे प्रत्याशियों का दक्षता भाषण बुधवार को हुआ। पांच मिनट के संबोधन में ही कई प्रत्याशियों की ‘दक्षता’ सबके सामने आ गई। किसी की जुबान पांच मिनट में 15 बार लड़खड़ाई तो कोई समय खत्म होने से पहले ही धन्यवाद बोल कर खिसक लिया। छात्रसंघ भवन की ऐतिहासिक प्राचीर से इन पदों के प्रत्याशियों के संबोधन की व्यवस्था इस मकसद से की गई है कि इसी बहाने उनकी भाषण क्षमता का आंकलन हो सके।

प्रत्याशियों के विचार और योजनाओं से छात्र रूबरू हो सकें। एक तरीके से दक्षता भाषण इनके राजनीतिक जीवन का पहला इम्तेहान माना जाता है। पांच प्रत्याशियों को छोड़ बाकी सभी इस इम्तेहान में असफल साबित हुए। ज्यादातर प्रत्याशियों के पास न तो कोई नया मुद्दा था और न ही उनके विचार स्पष्ट थे। ये प्रत्याशी बस लाइब्रेरी और हॉस्टल की समस्या के इर्दगिर्द ही भटकते रहे। कैंपस की अराजकता जैसे ज्वलंत मुद्दे पर ज्यादातर प्रत्याशी चुप्पी साधे रहे। चुनाव में धनबल और बाहुबल के प्रयोग के खिलाफ वे प्रत्याशी भी बोले, जिन्हें हर रोज गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ घूमते और पानी की तरह पैसा बहाते देखा जा रहा है। यह जरूर रहा कि इनके संबोधन के वक्त नीचे खड़े छात्रों ने जमकर हूटिंग की।

सबसे ज्यादा हूटिंग राज्य में शासन कर रही एक पार्टी के प्रत्याशी के संबोधन के वक्त हुई। अपने अनोखे हाव-भाव और खर्चीले स्वभाव के कारण परिसर में चर्चा का केंद्र बना यह प्रत्याशी ठीक तरीके से अपनी पार्टी के अध्यक्ष का नाम तक नहीं ले सका। सबसे ज्यादा सराहना केंद्र में शासन कर रही पार्टी की छात्र इकाई के एक उम्मीदवार की हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कट भगवा रंग का कुर्ता पहनकर आए इस प्रत्याशी के संबोधन के वक्त हूटिंग करने वाले विरोधी भी शांत हो गए थे। मंच से जब इसने वंदे मातरम का जयघोष किया तो जवाब में नीचे खड़े छात्र भी जोरदारी से वंदे मातरम बोले।

नहीं चले ईंट-पत्थर शब्द बाण से प्रहार
 पुरनिए बताते हैं कि दक्षता भाषण में ईंट-पत्थर चलना। प्रत्याशी समर्थकों में मारपीट, झड़प परंपरा सी बन गई थी लेकिन बुधवार को ऐसा कुछ नहीं हुआ। ईंट-पत्थर की बजाय शब्द बाण चले। नेताओं ने भाषण के वक्त दूसरे प्रत्याशियों की खिंचाई भी की। किसी ने प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का जिक्र किया तो किसी ने धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल कर चुनाव लड़ने वालों को सबक सिखाने की अपील की।

बाहर किए गए पूर्व छात्र नेता
 2005 में छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए अजीत यादव और 2012 में इसी पद पर चुने गए दिनेश सिंह यादव तथा पूर्व महामंत्री संजय सिंह भी मंच पर जाना चाहते थे लेकिन चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरके उपाध्याय और उनकी टीम ने इन्हें रोक दिया। प्राचीर पर सिर्फ पूर्व अध्यक्षों के बैठने की अनुमति है लेकिन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में अजीत और दिनेश का निर्वाचन हाईकोर्ट से रद हो चुका है इसलिए इन्हें रोका गया। दिनेश यादव जबरिया जाना चाहते थे तो चीफ प्रॉक्टर ने पुलिस बल का प्रयोग कर उन्हें कैंपस से बाहर करा दिया।

छह पूर्व अध्यक्षों ने बढ़ाया उत्साह
 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष प्रत्याशियों का उत्साह बढ़ाने के लिए छह पूर्व अध्यक्ष भी प्राचीर पर मौजूद थे। 1990 में अध्यक्ष रहे लक्ष्मीशंकर ओझा, 1997 में अध्यक्ष रहे कृष्णमूर्ति सिंह यादव, 2003 में अध्यक्ष रहे संजय तिवारी, 2004 में अध्यक्ष चुने गए हेमंत कुमार टुन्नू और 2013 में अध्यक्ष बने कुलदीप सिंह केडी मंच पर बैठे थे जबकि 1987 में अध्यक्ष रहे केके राय संचालन कर रहे थे। दक्षता भाषण से पहले पूर्व अध्यक्षों ने विचार व्यक्त किए और छात्रों को छात्रसंघ की गौरवशाली परंपरा से परिचित कराया। पूर्व अध्यक्षों को वह दिन याद आ गया जब उन्होंने इस प्राचीर पर भाषण देकर वोट मांगे थे।

अब भी लाइब्रेरी, हॉस्टल सबसे बड़ा मुद्दा
 इस बार के चुनाव में भी पिछले दो चुनावों की तरह लाइब्रेरी सबसे बड़े मुद्दे के तौर पर रहा। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के ज्यादातर प्रत्याशियों ने अपने भाषण में कहा कि वह चुनाव जीतने के बाद लाइब्रेरी से किताबें इश्यू कराने की व्यवस्था करेंगे। नई किताबें मंगवाना भी उनकी प्राथमिकता होगी। इसकी वजह यह है कि समस्या हर छात्र से जुड़ी हुई है। इविवि की लाइब्रेरी से एक दशक से किताबें इश्यू नहीं की जा रही हैं। लाइब्रेरी में बैठकर किताबें पढ़ने और जरूरत पड़ने पर उसकी फोटो कॉपी कराने की ही छूट है। कई प्रत्याशियों ने लाइब्रेरी 24 घंटे खुलवाने की भी बात कही। प्रत्याशियों ने हॉस्टल का मुद्दा भी उठाया और कहा कि चुनाव जीतने के बाद वे हॉस्टल की समस्या का समाधान कराएंगे। नए हॉस्टलों के निर्माण के लिए इविवि प्रशासन पर दबाव बनाएंगे।

खूब चला शेरो-शायरी का दौर
दक्षता भाषण के दौरान शेरो-शायरी का दौर भी खूब चला। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के सभी प्रत्याशियों ने कोई न कोई शेर जरूर पढ़ा। किसी ने दुष्यंत कुमार की लाइन सुनाई तो कुछ ने यह कहते हुए लुभाने का प्रयास किया कि जहां छात्रों का पसीना बहेगा वहां वे अपना खून बहा देंगे।

कई बार मची भगदड़
 दक्षता भाषण के दौरान छात्रसंघ भवन के सामने और बाहर कई बार भगदड़ भी मची। भगदड़ उस समय मची जब प्रत्याशी समर्थकों के साथ परिसर में दाखिल हो रहे थे। कुछ छात्र बिल्डिंग पर चढ़ गए। चीफ प्रॉक्टर और पुलिस ने इन्हें उतारा तो भगदड़ मच गई। यह जरूर रहा कि इसमें कोई चुटहिल नहीं हुआ। चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरके उपाध्याय, डॉ. रामसेवक दुबे, प्रो. धनंजय यादव और सुरक्षाधिकारी अजय सिंह गेट पर डटे रहे। मंच पर डीएसडब्ल्यू प्रो. जगदंबा सिंह, चुनाव अधिकारी डॉ. एनके शुक्ला कमान संभाले हुए थे।

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