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यदि कैब घर तक छोड़ती तो बच सकती थी उत्कर्ष का जान

उत्कर्ष कैब वाले भइया से कहता था मुङो घर पर छोड़ा करो लेकिन वह भीड़भाड़ का हवाला देकर 250 मीटर पहले छोड़ देता था। अगर वह उत्कर्ष को घर पर छोड़ता तो वह आज हमारे साथ होता। यह कहकर उत्कर्ष का दोस्त एवं सहपाठी शशांक फफक उठता है।

शशांक ने बताया कि वह और उत्कर्ष बेस्ट फ्रेंड थे। दोनों एक साथ कैब से जाते और आते थे। वह उत्कर्ष से कुछ दूर पहले उतरता था। शशांक ने बताया कि अक्सर उत्कर्ष कैब चालक से कहता था कि उसे वह घर पर छोड़ा करे। लेकिन कैब चालक उसकी बात को अनसुना कर देता था। कैब चालक का कहना था कि अगर वह उत्कर्ष को घर के पास छोड़ेगा तो जाम में फंस जाएगा। फिर ऐसी मांग हर बच्चा करने लगेगा।

रोते हुए शशांक ने कहा कि अगर कैब चालक उत्कर्ष को घर छोड़ता तो आज वह हमारे साथ होता। उसे जरा सा भी अहसास होता कि ऐसा होगा तो वह उत्कर्ष को अकेले नहीं छोड़ता। जल्द से जल्द पुलिस उसके दोस्त के हत्यारों को गिरफ्तार करे। उसे स्कूल में घटना की सूचना मिली। इसके बाद वह अपने पिता के साथ सीधे उत्कर्ष के घर चला आया। बड़ी मुश्किल से वह अपने पिता के साथ घर जाने को तैयार हुआ।

शशांक भी विवेकानंद स्कूल की आठवीं कक्षा का छात्र है। दोनों एक ही वर्ग में पढ़ते थे। यहां तक कि शशांक का रोल नंबर 35 और उत्कर्ष का 40 था। शशांक ने बताया कि बुधवार को दोनों स्कूल के मैदान में खूब खेले। इसके बाद उत्कर्ष ने बड़ी जोर से भूख लगने की बात कही। इसके बाद शशांक ने चिप्स खरीदकर उत्कर्ष को दिया।

शशांक ने कहा कि उसे भरोसा नहीं हो रहा है कि उसका दोस्त आज उसके साथ नहीं है। क्या उत्कर्ष किसी के बहकावे में आसानी से आने वाला लड़का था यह पूछने पर शशांक ने कहा कि ऐसा नहीं था।

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