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बढ़ी रही हैं मोबाइल चोरी की घटनाएं: अदालत

दिल्ली की एक अदालत ने चोरी का मोबाइल फोन रखने के मामले में एक युवक की दोषसिद्धि और 18 महीने के कारावास की सजा निरस्त करने से इंकार करते हुए कहा, मोबाइल फोन छीनने की घटनाएं बढ़ रही हैं और इन घटनाओं से निबटने के लिए उपाय करना उसका कर्तव्य है।
     
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ दोषी नौशाद की अपील का निबटारा करते हुए कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई कमी नहीं है।
     
न्यायाधीश ने कहा, मोबाइल फोन छीनने और लूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। अपराध के पीडि़त के लिए डर पैदा करने के अलावा ये घटनाएं चिंता भी उत्पन्न करती हैं।
     
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय करना अदालत का कर्तव्य है। हालांकि अदालत ने पांच हजार रूपये का जुर्माना नहीं देने पर नौशाद द्वारा 30 दिन के सश्रम कारावास की सजा काटने की सजा को साधारण कारावास में तब्दील कर दिया।
     
अदालत ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत, यह सुरक्षित रूप से माना जा सकता है कि अगर आरोपी ने खुद मोबाइल फोन नहीं चुराया, तो भी उसे हिरासत में लिये जाने के समय, कम से कम यह पता था कि यह चोरी का मोबाइल फोन है।
     
नौशाद को भादंसं की धाराओं 392 (चोरी) और 411 (चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) के तहत अपराधों के लिए आरोपित किया गया था लेकिन उसे केवल चोरी की संपत्ति रखने के लिए दोषी ठहराया गया क्योंकि चोरी का मोबाइल उसके कब्जे में मिला था। आरोपपत्र के अनुसार, नौशाद के पास मिला मोबाइल चार जनवरी 2014 को गौरव अरोड़ा नाम के व्यक्ति का चोरी हुआ फोन था।

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