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'मध्यावधि चुनाव पर शरद पवार की टिप्पणी निंदनीय'

'मध्यावधि चुनाव पर शरद पवार की टिप्पणी निंदनीय'

शिवसेना ने मध्यावधि चुनाव की टिप्पणी को लेकर आज राकांपा प्रमुख शरद पवार पर हमला करते हुए कहा कि वह वह अविश्वास की राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं और वर्तमान अस्थिरता का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

राकांपा ने यद्यपि महाराष्ट्र विधानसभा में अल्पमत भाजपा सरकार को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन कल पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि राज्य सरकार की स्थिरता राकांपा की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहने को भी कहा था।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया कि शरद पवार इस अस्थिर सरकार का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन यहां शिवसेना मजबूती से खड़ी होगी। पवार जो चाहें, करने दो। शिवसेना विपक्षी दल के रूप में ईमानदारी और पूरी सत्यनिष्ठा से अपनी भूमिका निभा रही है।

शिवसेना ने आरोप लगाया कि पवार अविश्वास की राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं, इसीलिए पहले उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया और अब इसे वापस लेने की धमकी दे रहे हैं। पार्टी ने कहा, पवार सोचते हैं कि वह अपनी इच्छा के अनुसार राजनीति कर सकते हैं और राजनीतिक स्थिति को उलट पलट सकते हैं। वह अपने 41 विधायकों के साथ नयी सरकार के भविष्य को अपने हाथों में रखना चाहते हैं। अस्थिर सरकार पर उनकी राजनीति टिकी है। लेकिन उन्होंने वर्तमान राजनीतिक स्थिति की जो तस्वीर पेश की है, वह हास्यास्पद है।

इसने कहा कि पवार के शब्दों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि वह कहते कुछ हैं, करते कुछ और हैं, यह उनकी आदत है। संपादकीय में कहा गया कि भ्रम की हवा पैदा करने और फिर इससे राजनीतिक लाभ उठाने की उनकी आदत है। यह अस्तित्व बचाने की उनकी राजनीति है। भाजपा के पास वर्तमान में प्रभावी 287 सदस्य संख्या वाली विधानसभा में 121 विधायक हैं। राकांपा के 41 विधायकों के समर्थन से उसने आसानी से बहुमत साबित कर दिया था। यदि राकांपा समर्थन वापस लेती है, तो सात निर्दलियों और कुछ छोटे दलों के समर्थन के बावजूद वह बहुमत के जादुई आंकड़े 144 से पीछे रह जाएगी।

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  • Web Title:'मध्यावधि चुनाव पर शरद पवार की टिप्पणी गलत'