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गीता प्रेस ने धार्मिक किताबों का ई-संस्करण नेट पर किया अपलोड

विश्व प्रसिद्ध गीताप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, हनुमान चालीसा सहित दजर्नों पुस्तकें अब कोई भी ऑनलाइन पढ़ सकता है। गीताप्रेस ने हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तमिल, मलयालम, उड़िया, बंग्ला और तेलगू भाषा की दो दजर्न पुस्तकों का ई-संस्करण ऑनलाइन कर दिया है। अधिकृत वेबसाइट पर बस एक क्लिक करते ही पूरी पुस्तक सामने होगी। वह भी नि:शुल्क।


1926 से लगातार प्रतिमाह हिन्दी में प्रकाशित होने वाली ‘कल्याण’ और 1934 से अंग्रेजी प्रकाशित होने वाली ‘कल्याण कल्पतरु’ भी वेबाइट पर उपलब्ध हैं। इन दोनों पुस्तकों को पढ़ने के लिए अलग-अलग वेबसाइट पर लॉग ऑन करना होगा। जानकर खुशी होगी कि गीताप्रेस ने अपना एक फेसबुक अकाउण्ट भी बना दिया है। इस अकाउण्ट पर कोई भी पाठक अपना संदेश या विचार दे सकता है।

इन्हें पढ़ सकते हैं ऑनलाइन
अंग्रेजी - हनुमान चालीसा, गीता, श्रीरामचरित मानस और कल्याण।
हिन्दी - गीता साधक संजीवनी, गीता, गजेन्द्र मोक्ष, श्रीविष्णु सहस्रनाम, श्रीनारायण कवच, श्रीरामरक्षास्तोत्र, श्रीशिवमहिम्न: स्त्रोत, सुन्दरकाण्ड।
गुजराती - सुन्दरकाण्ड, हनुमान चालीसा और श्रीशिव सहस्रनामस्तोत्र।
मराठी - श्रहरिपाठ, ज्ञानेश्वरी और सार्थ मनाचे श्लोक।
तेलगू - शिव स्तोत्रवली, स्तोत्र कदम्बम, श्रीनामरामायणम् एवं हनुमान चालीसा, पंचसूक्तमुलु रुद्रमु सस्वरमु और श्रीवेंकटेश्वर स्तोत्रवली।
कन्नड़ - हनुमत् स्तोत्रवली, नित्यस्तुति एवं आदित्य हृदय स्तोत्रम् और श्रीललिता सहस्रनामस्तोत्रम।
तमिल - श्री मुरुगतन तुदिमालै और तिरुप्पावै विलक्कम्।
मलयालम - श्रीमद्भगवद्गीता।
उड़िया - श्रीहनुमान चालीसा और संत जगन्नाथ दास कृत श्रीमद्भगवदगीता-एकादश स्कन्ध।
बंग्ला - हनुमान चालीसा, श्री श्रीकृष्णेर अष्टोत्तर शतनाम और स्तवमाला।

 रोचक जानकारी
- गीताप्रेस गोरखपुर से स्थापना काल 1923 से प्रकाशित हो रही हैं पुस्तकें
- कल्याण 1926 और कल्याण कल्पतरु 1934 से हो रही प्रकाशित
- पन्द्रह विभिन्न भाषाओं में हो रहा है प्रकाशन
- स्थापना काल से 31 मार्च 2014 तक कुल 58.25 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं
- सर्वाधिक भक्त चरित्र एवं भजनमाला की 12.44 करोड़ और 11.42 करोड़ प्रति श्रीमद्भगवदगीता की प्रकाशित हो चुकी हैं
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अब विश्व के किसी भी कोने में कोई भी आसानी से गीताप्रेस की पुस्तकें अधिकृत वेबसाइट पर क्लिक करते ही आसानी से पढ़ सकता है। चुनिंदा पुस्तकों को ऑनलाइन किया गया है। जल्द ही कुछ और पुस्तकों को वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
डॉ. लालमणि तिवारी, प्रोडक्शन मैनेजर, गीताप्रेस

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