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मोदी ने मसूरी के जरिए जोड़ा आस्ट्रेलिया से नाता

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारत और आस्ट्रेलिया के बीच रिश्ते जोड़ने के लिए मसूरी को माध्यम बनाया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई सांसदों से मसूरी में मौजूद एक आस्ट्रेलियाई नागरिक जॉन लेंग की कब्र का किया। जॉन लेंग अंग्रेजों के खिलाफ झांसी की रानी के वकील थे। उनकी मृत्यु मसूरी में हुई थी।

क्या कहा मोदी ने
‘आज से 150 साल पहले, ऑस्ट्रेलियन लेखक और वकील जॉन लैंग ने भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई एक बहादुर योद्धा की तरह लड़ी थी। यह लड़ाई उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर लड़ी। वह मृत्यु र्पयत भारत के महत्वपूर्ण हिल स्टेशन मसूरी में रहे। ’

कौन थे जॉन लैंग
देसी रियासतों को हड़पने के लिए लार्ड डलहौजी ने दत्तक पुत्र अधिनियम बनाया था। इस अधिनियम के अनुसार जिन रियासतों के वारिस नहीं थे, उन्हें एक के बाद एक ईस्ट इंडिया कंपनी में मिलाया जा रहा था। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के सामने जब ऐसी स्थिति आई तो उन्होंने कोलकाता के उच्च न्यायालय में आस्ट्रेलियाई मूल के बैरिस्टर जॉन लैंग की मदद से अपील दायर की। जॉन लैंग भले ही यह मुकदमा हार गये, पर इससे उन्होंने भारतीयों के दिलों में जगह बना ली। जॉन लैंग आस्ट्रेलिया में भी अंग्रेजों के दमनकारी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। उन्हें अंग्रेजों ने तब आस्ट्रेलिया से निकाल दिया था। 18 जून 1858 को लक्ष्मीबाई की शहादत के बाद लैंग मसूरी आ गये। 20 अगस्त 1864 को जॉन लैंग ने मसूरी में ही अंतिम सांस ली। लैंग ने मसूरी से मफसिलाइट अखबार निकाला जो, आज मसूरी निवासी इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी निकाल रहे हैं। लेंग की कब्र मसूरी की कैमलबैक रोड स्थित कब्रगाह में मौजूद है।

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