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जीत की आदत डालें

बांग्लादेश क्रिकेट के लिए वाकई यह तारीखी लम्हा है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने टेस्ट सीरीज में जिंबाब्वे को 3-0 से रौंदकर अपने अब तक के सबसे शानदार खेल का मुजाहरा किया है। जाहिर है,  इस जीत से सब खुश हैं और हम भी अपनी तरफ से टीम के टाइगरों को दिली मुबारकबाद देते हैं। लेकिन इस बड़ी कामयाबी के साथ हमारे क्रिकेटरों के ऊपर एक खास जिम्मेदारी भी आन पड़ी है,  और वह है जीत के इस सिलसिले को बरकरार रखने की जिम्मेदारी। हमने इससे पहले टेस्ट सीरीज में कभी जीत का स्वाद नहीं चखा था,  लेकिन इस बार फतह का फासला भी खास रहा। इस पूरी सीरीज में हमारी टीम ने लगातार बेहतर खेल खेला और अब उससे यही उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में भी वह इसी तेवर के साथ मैदान में उतरेगी। साल 2013-14 का ज्यादातर वक्त हमारी टीम के लिए खुशगवार नहीं रहा। क्रिकेट के किसी भी फॉर्म में हमारी टीम कोई खास कमाल नहीं कर पाई,  मगर अब लगता है कि आखिरकार वह उस बुरे दौर से निकल आई है।

अब जब पांच एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला सामने है,  तो हमारे खिलाड़ियों को अपने सामर्थ्य का परिचय देते हुए इस सीरीज को जीतने की कोशिश करनी चाहिए। चूंकि ये मैच बांग्लादेश में ही खेले जाने हैं,  इसलिए हमारे खिलाड़ी घरेलू मैदानों पर अपने प्रदर्शन के चरम पर होंगे और फिर हमारे पास नए बेहतरीन खिलाड़ियों की भी कोई कमी नहीं है। ऐसे में,  टीम के लिए यह मुश्किल लक्ष्य नहीं होना चाहिए। अब हमारी कोशिश विदेशी दौरों में दुनिया की दमदार टीमों के खिलाफ टेस्ट और वनडे मैचों में जीत पाने की होनी चाहिए। पूर्व में हम देख चुके हैं कि हमारे टाइगरों ने किस तरह एक सीरीज में बेहतरीन खेल दिखाया, लेकिन फिर वे हारते चले गए। ऐसी आशंकाओं को गलत साबित करने के लिए हमारे खिलाड़ियों और उनसे जुड़े तमाम लोगों को अपनी पूरी ताकत लगानी होगी,  ताकि जीत का जो जज्बा हमने अभी पाया है,  वह लगातार बना रहे। हमारे खिलाड़ियों के सिर जीत का नशा न चढ़े, बल्कि वे इसे अपनी आदत का जरूरी हिस्सा बनाएं।  
द डेली स्टार,  बांग्लादेश

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