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क्रिकेट की काली दुनिया

बीसीसीआई के कर्ता-धर्ता कुछ भी कहें,  मगर मुद्गल समिति की रिपोर्ट ने भारतीय क्रिकेट की कलंक-कथा की पुष्टि कर दी है। यह बेहद शर्मनाक बात है कि जिस खेल के साथ करोड़ों हिन्दुस्तानी भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं,  उसके कुछ खिलाड़ी और अधिकारी उनसे बेईमानी करते रहे। यह निर्लज्जता की हद है। बीसीसीआई के बड़े ओहदेदार इन सब गोरखधंधे से बेखबर नहीं हो सकते,  हालांकि वे लगातार यही दावा करते रहे हैं। यदि वाकई उन्हें कुछ भी मालूम नहीं था,  तो वे अपने पद पर बैठने के लायक वैसे भी नहीं रह जाते। इसलिए वक्त आ गया है कि सभी बेईमानों को बेनकाब करते हुए उन्हें बीसीसीआई से हमेशा-हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काले धन को लेकर दुनिया भर को चेता रहे हैं। क्या वह बीसीसीआई के आर्थिक तंत्र को पारदर्शी बनाने की कोशिश करेंगे?  प्रधानमंत्री मोदी एक वक्त खुद गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसलिए उन्होंने भी सट्टेबाजी,  टैक्स छूट आदि के बारे में बहुत कुछ सुना ही होगा। क्या प्रधानमंत्री बीसीसीआई को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्वच्छता का अभियान चलाएंगे?  अगर वह ऐसा कर सके,  तो करोड़ों हिन्दुस्तानियों की हिमायत उन्हें इस खेल की सफाई के जरिये हासिल हो जाएगी। क्रिकेट से प्रेम करने वाले,  उस पर लगने वाले हर दाग से दुखी होते हैं। कुछ कीजिए मोदीजी।
राकेश सिंह, गुरु रामदास नगर,  दिल्ली-92

नदी को नदी ही रहने देते

हम भारतवासी बड़े एहसानमंद प्रवृत्ति के होते हैं। हम बेजान वस्तुओं के प्रति भी एहसानमंद रहते हैं,  तभी तो हमारे यहां नदियों को भी पूजा जाता है। नदियां जीवनदायिनी हैं। प्राचीनकाल में कितनी ही सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। किंतु अफसोस की बात है कि हम इतने स्वार्थी हो गए हैं कि अपने निजी लाभ हेतु,  उदासीनतावश या अज्ञानतावश नदियों को गंदा करते जा रहे हैं। कितना अच्छा होता कि हम भले ही नदियों को देवी का स्थान न देते, पर अपनी जीवनदायिनी को गंदा न करते। यह दोहरा चरित्र हमें कहां ले जाएगा?  अच्छा होता कि हम नदी को नदी ही रहने देते।
भारत वीर गंगवार,  पूरनपुर,  पीलीभीत

अब लैपटॉप दोषी

लोकसभा चुनाव परिणाम को आए छह महीने बीत गए,  लेकिन सपा सुप्रीमो अभी तक अपनी पार्टी की शर्मनाक हार का सही-सही कारण नहीं ढूंढ़ पाए हैं। आये दिन कभी उनके और कभी आजम खां के बौखलाहट भरे बयान मीडिया में आते रहते हैं। पहले अखिलेश यादव ने बयान दिया था कि उन्होंने चुनावों के दौरान चौबीस घंटे बिजली दी,  लेकिन उस बिजली से टीवी देखकर और मोदी के भाषणों से प्रभावित होकर लोगों ने भाजपा को वोट दे दिया। अब मुलायम सिंह यादव मुफ्त में बांटे गए लैपटॉप को दोषी ठहरा रहे हैं। मुलायम सिंह अभी तक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि उनकी पार्टी के नेताओं और सपा कार्यकर्ताओं के क्रिया-कलापों तथा अमर्यादित भाषणबाजी के कारण पढ़ी-लिखी जनता ने सपा से किनारा कर लिया।
रामानंदी अग्रवाल, सिविल लाइन्स,  बिजनौर

स्वच्छता का पाखंड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अच्छी सोच के साथ स्वच्छता अभियान का शुभारंभ किया था,  मगर उनकी ही पार्टी के लोगों ने उसे पाखंड में तब्दील कर दिया। पहले साफ-सुथरी जगह पर कचरे फैलाने और फिर झाड़ पकड़ फोटो खिंचवाने का उपक्रम पूरे देश में हो रहा है। इससे तो बेहतर होता कि प्रधानमंत्री अपनी पार्टी की सरकारों और नेताओं को पहले यह हिदायत देते कि वे अपने क्षेत्र के सफाईकर्मियों से संपर्क करें,  उनके साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें इलाके को साफ रखने में मदद करें। तब जमीनी स्तर पर सफाई के लिए जिम्मेदार लोगों को भी लगता कि देश का मुखिया उनके प्रति संवेदनशील है। फोटो खिंचाऊ पाखंड से तो उनके  श्रम का भी उपहास उड़ रहा है।
राकिया खानम,  दरियागंज,  दिल्ली

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