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विधायक शोएब इकबाल कांग्रेस की सदस्यता लेने की संभावना

कांग्रेस के परंपरागत वोटबैंक में शुमार अल्पसंख्यक मतदाताओं को आम आदमी पार्टी के  खेमे में जाने से राकने के लिए पार्टी कुछ अहम मुस्लिम चेहरों को जोड़ने की कवायद में जुट गई है। इसकी शुरुआत मटिया महल से विधायक शोएब इकबाल से हो सकती है। इकबाल अगले सप्ताह कांग्रेस की औपचारिकता सदस्यता ले सकते हैं।

समझा जाता है कि इकबाल के साथ उनके तुर्क मान गेट से निगम पार्षद पुत्र आले मोहम्मद इकबाल और जामा मस्जिद वार्ड से पार्षद भतीजे खुर्रम इकबाल कांग्रेस में शामिल होंगे। आले इकबाल ने बताया कि केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली सहित देश के बिगड़ते सांप्रदायिक सौहार्द को देखते हुए कांग्रेस को मजबूती देना एकमात्र विकल्प है। इकबाल ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान की पहल पर उनके पिता ने यह फैसला किया है।


हालांकि कांग्रेस की ओर से इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक इकबाल की मुलाकत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से हो चुकी है। समझा जाता है कि मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इकबाल को शामिल करने की मंजूरी दे दी है।

पहली बार होंगे कांग्रेस के साथ-
पुरानी दिल्ली की मटिया महल विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने गए शोएब इकबाल अगर कांग्रेस का दामन थामते हैं तो हाथ के निशान पर वह पहली बार किस्मत आजमाएंगे। उन्होंने इससे पहले वर्ष 1993 और 1998 में जनता दल के टिकट पर जबकि 2003 में जनता दल सेक्यूलर, 2008 में लोजपा और 2013 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कराई। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी में इकबाल के शामिल होने से अल्पसंख्यक जनाधार को साधने में न सिर्फ मटिया महल बल्कि पड़ोस की सीटों चांदनी चौक और बल्लीमारान में भी कांग्रेस को मदद मिलेगी। हालांकि इन दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार है मगर पिछले चुनाव में आप की लहर के कारण जीत का फासला काफी कम हो गया था।

कांग्रेस ही विकल्प-
इधर इकबाल को खुद पिछले पांच चुनाव में मिले मतों की संख्या में लगातार गिरावट आने के कारण सुरक्षित आशियाने की तलाश है। जानकारों की राय में मोदी लहर पर सवार भाजपा के पक्ष में धार्मिक आधार पर मतों के ध्रुवीकरण की आशंका को देखते हुए अल्पसंख्यक मतों को कांग्रेस के पक्ष में करना इकबाल के लिए आसान होगा। ज्ञात हो कि 1993 और 1998 में 62% और 65% मत पाने के बाद इकबाल को 2003 में 52%, 2009 में 41% और 2013 में महज 31% वोट मिले थे। निरंतर गिरते मतप्रतिशत को देखते हुए इकबाल के लिए कांग्रेस बेहतर विकल्प समझा जा सकता है।


नई दिल्ली वरिष्ठ संवाददाता
गोपनीय दस्तावेज लीक करने के मामले में आरोपी पत्रकार की जमानत को अदालत ने रद्द कर दिया है। साथ ही अदालत ने आरोपी पत्रकार मैथ्यू सैम्यूल को हिरासत में लेकर जेल भेजने के आदेश दिए। सैम्यूल पर संवेदनशील दस्तावेजों को न्यूज पोर्टल पर अपलोड करने का आरोप है।
तीस हजारी स्थित सीबीआई स्पेशल जज जे पी एस मलिक की अदालत ने सैम्यूल को 21 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश देते हुए कहा कि वह बिना वजह मामले की सुनवाई में बाधा डाल रहे हैं।

इस मामले में पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके सैम्यूल के सुनवाई पर हाजिर नहीं होने के चलते पिछली तारीख 13 अक्तूबर को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। इन्हीं वारंट को तामील कराने के लिए सैम्यूल को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी के सुनवाई पर उपस्थित नहीं हो पाने के कारण नियमित सुनवाई प्रभावित हो रही है। कई बार उन्हें चेताया भी गया है। लिहाजा अदालत इस बार आरोपी को हिरासत में लेने का निर्देश दे रही है।

सैम्यूल ने बीमारी का दिया हवाला
वारंट पर अदालत में पेश हुए सैम्यूल ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि उनका ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी थी। जिसकी वजह से वह पिछली सुनवाई पर हाजिर नहीं हो पाए। इस मामले में अदालत में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। इस मामले में सीबीआई ने सैम्यूल के अलावा तहलका.कॉम(अन्वेषण)  के तत्कालीन संपादक अनिरुद्ध बहल समेत चार लोगों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते मई माह में बहल, थोमस और कुमार को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। आरोप है कि तहलका.कॉम पर नौ अक्तूबर 2000 को संवेदनशील दस्तावेजों को वेबसाइट पर अपलोड किया।

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