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डायस और असर-2014 की रिपोर्ट से खुली राज्य की शिक्षा व्यवस्था की कलई

एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता और साफ-सफाई को लेकर देशवासियों को जागरूक कर रहे हैं, वहीं झारखंड के हजारों स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी हाईस्कूल में पढ़नेवाली छात्राओं को होती है। मानव संसाधन विभाग के डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (डायस) की रिपोर्ट के मुताबित हाईस्कूल में पढ़ने वाली 3 प्रतिशत की छात्राएं केवल शौचालय की कमी के कारण स्कूल छोड़ देती हैं।

16 प्रतिशत स्कूलों में शौचालय नहीं
एनुअल स्टेट्स ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर-2014) के मुताबिक राज्य के 16.7 प्रतिशत स्कूलों में शौचालय ही नहीं हैं। जबकि 42.8 प्रतिशत स्कूलों में शौचालय तो हैं, लेकिन इस्तेमाल लायक नहीं। 22.7 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं, जहां बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं हैं।

40 प्रतिशत स्कूलों में ठीक है शौचालय
असर रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 40.5 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में शौचालय ठीक हालत में है। यह पिछले तीन साल के दौरान हुआ है। इससे पहले 2010 में महज 26.8 प्रतिशत, 2011 में 37.5 प्रतिशत और 2012 में 37 प्रतिशत स्कूलों में शौचालय ठीकठाक हालत में थे।

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आंकडे़ एक नजर में
40,666 सरकार स्कूल हैं झारखंड में
4736 स्कूलों में छात्राओं के लिए नहीं हैं शौचालय
5484 स्कूलों में छात्रों के लिए नहीं हैं शौचालय
3979 स्कूलों में शौचालय तो हैं, लेकिन छात्राएं इस्तेमाल नहीं कर पातीं
3350 स्कूलों में शौचालय तो हैं, लेकिन छात्र इस्तेमाल नहीं कर पाते
नोट : आंकडे़ मानव संसाधन विभाग की डायस रिपोर्ट के हैं।

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  • Web Title:डायस और असर-2014 की रिपोर्ट से खुली राज्य की शिक्षा व्यवस्था की कलई