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‘अमेरिका-यूरोप ने पैदा किया खाद्यान्न संकट’

दुनिया भर में अनाज की कीमतों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक एक कार्यबल गठित करेंगे। संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को खाद्य फसलों के जरिए जव ईंधन उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाले अमेरिका और यूरोपीय संघ को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराया। संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि जीन जीगलर ने जव ईंधन के प्रोत्साहन को ‘आपराधिक कदम’ करार दिया और कहा कि अमेरिका व यूरोपीय संघ की ईंधन नीतियों की वजह से ही दुनिया भर में खाद्य पदार्थो की कीमतें आसमान छू रही हैं। पिछले साल अमेरिका ने अपनी एक तिहाई मकई की फसल का इस्तेमाल जव ईंधन उत्पादन के लिए किया। उधर विश्व बैंक ने बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए राष्ट्रों से अनाज के निर्यात पर रोक नहीं लगाने को कहा। स्विटजरलैंड की राजधानी बर्न में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों की वजह से एक अभूतपूर्व चुनौती पैदा हो गई है। नतीजतन गरीब देशों में भूख, दंगे-फसाद और जमाखोरी की समस्या खड़ी हो गई है। विश्व खाद्य संगठन ने इस वर्ष सात करोड़ तीस लोगों को भोजन उपलब्ध कराने लक्ष्य रखा है। विश्व बैंक गरीब देशों की सहायता के लिए एक त्वरित वित्तीय सुविधा का गठन करने पर विचार कर रहा है। अगले साल अफ्रीका में कृषि के लिए र्का की राशि दोगुना बढ़ाकर 80 करोड डॉलर कर दी जाएगी। इस बीच विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जोलिएक और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने देशों से अनाज के निर्यात पर रोक नहीं लगाने का आह्वान किया है। निर्यात पर रोक से जमाखोरी बढ़ेगी, चीजों के दाम बढ़ेंगे और गरीबों के लिए विकट स्थिति पैदा हो जाएगी। विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक पास्कल लेमी ने कहा कि इस संकट के मद्देनजर दोहा दौर की वार्ता को जल्द निपटाया जाना और भी ज्यादा जरूरी है। अमेरिकी सीनेट में शीर्ष डेमोक्रेट खाद्य संकट से निपटने के लिए इराकी युद्ध बजट के तहत बीस करोड़ डालर की आपात व्यवस्था कर रहे हैं।ं

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