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कोर्ट पर भी लागू होता आरटीआई

विधि एवं न्याय मंत्रालय से सम्बंधित संसदीय समिति ने स्पष्ट किया है कि आरटीआई कानून के दायर में सभी संवैधानिक संस्थाएं आनी चाहिएं और जहां तक न्यायपालिका का सवाल है तो न्यायिक फैसले लेने की प्रक्रिया के अलावा उसके सभी प्रशासनिक कार्य इसके दायर में आएंगे। कार्मिक, लोक शिकायत और विधि एवं न्याय मंत्रालय से सम्बंधित संसदीय समिति ने संसद में पेश अपनी ताजा रिपोर्ट में न्यायपालिका में सूचना का अधिकार लागू होने के बार में स्थिति स्पष्ट करने के साथ ही इस कानून का व्यापक प्रचार करने पर जोर दिया है। समिति चाहती है कि क्षेत्रीय समाचार पत्रों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में इसका समुचित प्रचार किया जाना चाहिए ताकि इस कानून के बार में समाज के सभी वर्गो में जागरूकता पैदा की जा सके। समिति के अध्यक्ष डा. ई.एम.एस. नेचियप्पा ने वर्ष 2008-0ी विभागीय अनुदान मांगों पर मंगलवार को तीन प्रतिवेदन और अदालतों में लम्बित मामलों के बार में कार्रवाई रिपोर्ट पेश की। जहों की नियुक्ित के मामले में कार्यपालिका की भूमिका के बार में समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि यह काम सिर्फ न्यायपालिका पर ही नहीं छोड़ा जाना चाहिए। समिति चाहती है कि सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में 1से पहले की स्थिति बहाल करने की दिशा में वैकल्पिक उपाय तैयार कर। सुप्रीम कोर्ट के इस बार में फैसले से पहले न्यायाधीशों की नियुक्ित में कार्यपालिका की भी भूमिका होती थी। समिति ने एक बार फिर उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने और सुप्रीम कोर्ट के जजों के समान सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करने की सिफारिश की है।

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