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हिसार में सतलोक आश्रम के बाहर भिड़े पुलिस और रामपाल के समर्थक

हिसार में सतलोक आश्रम के बाहर भिड़े पुलिस और रामपाल के समर्थक

हरियाणा में हिसार जिले के बरवाला स्थित स्वयंभू संत रामपाल के आश्रम में आज हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने रामपाल के समर्थकों को तितर बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस पर समर्थकों ने कथित रूप से गोली चलाई। पुलिस ने कथित तौर पर मीडियाकर्मियों को भी टारगेट किया और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया। 

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मीडिया पर पुलिसिया कार्रवायी को लेकर हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब की है। उधर सतलोक आश्रम में भड़की हिंसा में कई लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों और रामपाल के समर्थकों के बीच कई दिन से चला आ रहा गतिरोध आज हिंसक हो गया, क्योंकि हरियाणा सरकार पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामले में रामपाल को पेश करने के लिए शुक्रवार तक की समयसीमा दिए जाने के मद्देनजर स्वयंभू संत को पकड़ने की कोशिश में लगी है।

जब पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने अनुयायियों को तितर बितर करने की कोशिश की तो उन्हें कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि आश्रम के भीतर हजारों लोग मौजूद हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि रामपाल के समर्थक आश्रम के भीतर से गोलीबारी कर रहे हैं, लेकिन पुलिस जनहानि रोकने के लिए अधिकतम संयम बरत रही है।

आश्रम की दीवार का एक हिस्सा ढहा दिया गया और परिसर के भीतर धुएं का गुबार देखा गया। पुलिस ने यह भी बताया कि आश्रम के भीतर से उस पर पथराव भी हो रहा है। रामपाल की निजी सेना के अनेक अनुयायी परिसर की छत पर मौजूद हैं। अधिकारियों को रामपाल के अनुयायियों की ओर से लगतार कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पुलिस को भीड़ का सामना करना पड़ रहा है जिसमें शामिल कुछ लोग हथियारों से लैस हैं, लेकिन पुलिस जनहानि रोकने के लिए अधिकतम संयम बरत रही है। रामपाल (63) को कल उच्च न्यायालय में पेश होना था, लेकिन वह पेश नहीं हुए। उनके वकील ने उन्हें बीमार बताया और कहा कि वह बरवाला से करीब 270 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ आने की स्थिति में नहीं हैं। वह पेशी के लिए और समय चाहते हैं।

उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ तब नए सिरे से गैर जमानती वारंट जारी किया और अधिकारियों से कहा कि वे रामपाल को शुक्रवार तक पेश करें। स्वयंभू संत पहले भी तीन तारीखों पर पेश न होने के लिए स्वास्थ्य खराब होने की बात कह चुके हैं। आज सुबह आश्रम से बाहर निकलने में सफल रहे कुछ अनुयायियों ने कहा कि परिसर के भीतर हजारों लोग हैं और ज्यादातर तत्काल बाहर आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें स्वयंभू के लाठीधारी समर्थक बाहर नहीं आने दे रहे।

उन्होंने दावा किया कि यहां सतलोक आश्रम में अब भी मौजूद लोगों में एक बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है। उत्तर प्रदेश निवासी और खुद का नाम कुसुम बताने वाली 40 वर्षीय एक महिला अनुयायी ने कहा कि वह आज किसी तरह आश्रम से बाहर निकलने में सफल रही। उसने कहा, मैं बाहर निकल आई। अब भी अनेक लोग भीतर हैं।

आश्रम से बाहर आई एक अन्य महिला अनुयायी ने कहा, मैं दादरी की रहने वाली हूं। अब भी बहुत से लोग अंदर हैं और उनमें से अधिकतर बाहर आना चाहते हैं। लेकिन उन्हें आने नहीं दिया जा रहा। यह पूछे जाने पर कि अंदर रुकने के लिए उन पर कौन दबाव बना रहा है, अलीगढ़ निवासी एक महिला अनुयायी ने कहा, मैं बाहर आ गई। लोगों को भोजन पानी हासिल करने में मुश्किल हो रही है। लेकिन लाठीधारी कुछ लोगों ने हमसे अंदर ही रुके रहने को कहा और हमें रोकने की कोशिश की। उन्होंने हमसे कहा कि अदालत का फैसला जल्द आएगा और सबकुछ ठीक हो जएगा। हमने जिद की कि हम जाना चाहते हैं और हम समूह में बाहर आ गए।

हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले एक युवा अनुयायी ने कहा, मुझे अंदर रोक दिया गया। बाबा के बाहरी राज्यों के कुछ समर्थकों ने हमसे अंदर रुके रहने को कहा। उसने कहा कि रामपाल को अदालत के समक्ष तत्काल समर्पण कर देना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। इस अनुयायी ने कहा कि आश्रम के भीतर अब भी हजारों अनुयायी मौजूद हैं और उनमें से अधिकतर वहां से निकलना चाहते हैं। लेकिन उनसे कहा गया है कि उन्हें यहां भोजन मिलेगा। लेकिन बहुत से लोग नहीं सुन रहे हैं और धीरे धीरे बाहर आ रहे हैं। उसने कहा कि राशन की आपूर्ति भी काफी धीमी है। उसने आगे कहा कि उसके जैसे साधारण अनुयायियों ने इन दिनों में रामपाल को नहीं देखा।

रामपाल की जमानत रद्द करने पर फैसला सुरक्षित
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2006 के हत्या के एक मामले में स्वयंभू संत रामपाल की जमानत रद्द करने के मुददे पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत की एक खंडपीठ ने 10 नवम्बर को अवमानना मामले में रामपाल के पेश नहीं होने पर उनकी जमानत रद्द करने के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था। न्यायमूर्ति एम जयपाल और न्यायमूर्ति दर्शन सिंह की पीठ ने बचाव पक्ष, राज्य और अदालत मित्र की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

रामपाल के खिलाफ 2006 में रोहतक जिले में उनके आश्रम में हुए संघर्ष के बाद हत्या का एक मामला दर्ज किया गया था, जिसमें वह जमानत पर हैं। रामपाल पर 2006 की घटना के संबंध में साजिश रचने का आरोप है। स्वयंभू संत उच्च न्यायालय में तीन तारीखों पांच नवंबर, 10 नवंबर और 17 नवंबर को पेश होने में विफल रहे हैं। उच्च न्यायालय ने अवमानना मामले में उनके पेश नहीं होने पर कल नए सिरे से गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 21 नवंबर तक अदालत में पेश किए जाने का निर्देश दिया था।
 

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