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स्वास्थ्य प्रचार छोड़िए करोड़ों के लिए मारामारी

वास्थ्य से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के नाम पर करोड़ों रुपए के बजट को लेकर गृहयुद्ध के हालत पैदा हो गए हैं। प्रचार-प्रसार के लिए अधिकृत राज्य स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो के दो दर्जन से ज्यादा कर्मचारी पिछले दस साल से कोई काम नहीं कर रहे। अब इन्हें आईईसी ब्यूरो में मिला दिया गया है तो वहाँ पहले से तैनात कर्मचारी कमरों में ताला लगा कर चले गए हैं। वह प्रचार के बजट में हिस्सेदारी के लिए तैयार नहीं।ड्ढr राज्य स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो एक जमाने से राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करता रहा है। केन्द्र सरकार का साफ निर्देश है कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बजट का पाँच फीसदी हिस्सा ब्यूरो के जरिए प्रचार-प्रसार पर खर्च किया जाएगा। इसी तरह परिवार कल्याण से जुड़े प्रचार-प्रसार के लिए आईईसी ब्यूरो का गठन किया गया था। शिक्षा ब्यूरो जवाहर भवन के चौथे तल पर है और आईईसी ब्यूरो सीएमओ कार्यालय में। सन् 2000 में केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने शिक्षा ब्यूरो और आईईसी ब्यूरो का एकीकरण कर दिया। कागज पर तो यह एकीकरण हो गया लेकिन दोनों ब्यूरो के दफ्तर अलग-अलग रहे।ड्ढr सूत्र बताते हैं कि राज्य स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो को पिछले दस साल से प्रचार-प्रसार के लिए एक धेले का बजट नहीं मिला। ब्यूरो में 24 कर्मचारी तैनात हैं। पिछले दस साल से ये कर्मचारी कभी दफ्तर आते हैं कभी नहीं आते। इनके पास कोई काम भी नहीं। जब कुंभ जसे मेले लगते हैं तो इनकी डय़ूटी लग जाती है। लेकिन पिछले दस साल से हर महीने इन कर्मचारियों के वेतन के मद में करीब 3 लाख रुपया सरकारी खजाने से आ जाता है। इस संवाददाता ने मंगलवार को लंच के बाद स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो दफ्तर का मुआयना किया तो पाया कि वहाँ 24 में केवल तीन कर्मचारी मौजूद थे। दूसर कमर में एकाउंटेंट एक कर्मी के साथ बैठे थे। बाकी लोग कहाँ हैं? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था।ड्ढr आडिट के दौरान महालेखाकार ने आपत्ति दर्ज की है कि बिना काम के ये कर्मचारी वेतन कैसे ले रहे हैं। आडिट रिपोर्ट के बाद फरवरी 2006 में तत्कालीन चिकित्सा राज्यमंत्री जयवीर सिंह ने निर्देश दिया कि ब्यूरो को क्षय रोग, कुष्ठ रोग, मलेरिया,दिमागी बुखार आदि कार्यक्रमों के प्रचार के बजट का हस्तांतरित कर स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो से काम लिया जाए। इसके बावजूद ब्यूरो को प्रचार का काम नहीं दिया गया।ड्ढr राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के आने के बाद केन्द्र ने फिर निर्देश दिए कि शिक्षा ब्यूरो और आईईसी ब्यूरो मिलकर प्रचार का काम देखेंगे। स्वास्थ्य महानिदेशक ने बीती 11 अप्रैल शिक्षा ब्यूरो के 14 कर्मचारियों को आईईसी ब्यूरो में बैठने के निर्देश दिए। ड्ढr दीन दयाल उपाध्याय भवन स्थित आईसी ब्यूरो का हाल यह है कि इसमें केवल चार कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से कोई परिवार कल्याण से अटैच है तो कोई स्वास्थ्य विभाग से। राज्य स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो के कर्मचारी चार्ज लेने पहुँचे तो आईईसी ब्यूरो के कर्मचारी ताला बंद करके चले गए। कमर से सारी अतिरिक्त कुर्सियाँ हटा दी गई हैं। हाजरी रािस्टर तक ताले में बंद है। ब्यूरो के कर्मचारियों से काम नहीं लिया जा रहा।ड्ढr इस अराजकता की स्थिति के बार में पूछे जाने पर राज्य स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने माना कि ब्यूरो को प्रचार का बजट नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों के काम न करने के बार में वह चुप हो गए। चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक डा. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि आईईसी ब्यूरो में इन कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। डा. कुमार ने कहा कि इन कर्मचारियों को प्रचार प्रसार कार्य में लगाया जाएगा। इन्हें बजट न देने के बार में उन्होंने कहा कि पहले के बार में उन्हें जानकारी नहीं। ड्ढr

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