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पिया नहीं बाबुल के घर से उठी गीतू की अर्थी

कहते हैं बाबुल के घर से डोली और पिया के घर से अर्थी उठती है। गीतू की अर्थी पिया के घर से नहीं, बल्कि बाबुल के घर से उठ रही थी। अभागे ससुरालियों को बहू के अंतिम संस्कार में शामिल होने का भी मौका नहीं मिला।

सबको हंसाने, सबका दुख-दर्द बांटने वाली गीतू आज खामोश थी। मां-पापा, भाई, रिश्तेदार हर कोई गीतू की स्पंदनहीन देह से लिपटकर बेसुध हुए जा रहा था। जिस बिटिया को हंसी-खुशी ससुराल विदा किया था, वह कफन में लिपटकर लौटेगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। गीतू को अंतिम विदाई देने आए हर किसी की आंखें नम थीं। गीतू की अर्थी उठी तो पूरा मढ़ीनाथ सुबक पड़ा।

जिसने सुना, वही दौड़ पड़ा : गीतू का शव शाम 4:30 बजे विधायक विजयपाल सिंह के मढ़ीनाथ स्थित पैतृक निवास पर लाया गया। लोगों को जैसे ही खबर मिली, वे कोठी की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते विधायक के निवास के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। बच्चे, बूढ़े, गीतू की दोस्त सब गम में डूबे हुए थे। सबने बारी-बारी से गीतू के अंतिम दर्शन किए।

बस एक बार मम्मी बोल दे लल्ली : गीत का शव देखकर मां बेसुध हो गई। वह गीत के शव से लिपटती और फिर पछाड़ खाकर गिर पड़ती। बेबस मां को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे लोग खुद भी रोने लगे। जरा सा होश में आई तो बोलीं, बस एक बार मम्मी बोल दे लल्ली। इस दिन के लिए तो विदा नहीं किया था तुझको। अब मेरी चिंता कौन करेगा। अब तेरी मां किसके सहारे जिएगी।

अपनी मां को घुट-घुटकर मरने के लिए क्यों छोड़ गई तू। अब मम्मी क्या करेगी लल्ली। गीतू की अर्थी उठी तो मां फिर बेसुध हो गई। बोलीं- अभी मत ले जाओ, कुछ देर देखने दो बेटी को। अभी तो नजर भरके देखा भी नहीं। मां का दर्द देखकर गीतू की अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स सुबह पड़ा।

माफ कर देना बेटी, शैतानों से जोड़ा तेरा बंधन : सिटी श्मशान भूमि में गीतू की चिंता को मुखाग्नि देते पूर्व विधायक विजयपाल बुरी तरह फफक पड़े। वह गीतू के इस हाल के लिए खुद को कोस रहे थे। बोले- माफ कर देना बेटी। मैंने तेरा रिश्ता राक्षसों के परिवार में जोड़ दिया। मैं तेरा गुनहगार हूं। तू मेरी बेटी नहीं, बेटा था। अब पापा किससे अपने दिल की बात कहेंगे। तू बीच रास्ते में पापा का साथ छोड़कर क्यों चली गई बेटा।

गीत को अंतिम विदा देने पहुंचे हजारों लोग: सिटी श्मशान भूमि में गीत को विदा देने हजारों लोग पहुंचे। नेता, व्यापारी, वकील, अफसर, समाजसेवी हर कोई बस दौड़ा चला आया। सबने विजयपाल का हौसला बंधाने की कोशिश की मगर हर कोई उनके आंसू रोकते-रोकते खुद रो पड़ा। गीत को अंतिम विदाई देने सभी पार्टियों के नेता, व्यापारी, उद्योगपति, समाजसेवी सिटी श्मशान भूमि पहुंचे।

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