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बंदर ने रोक दी शताब्दी एक्सप्रेस

ओएचई लाइन से होकर कूद रहा बंदर मौत के मुंह में तो पहुंच ही गया, लेकिन जाते-जाते उसने इन्सुलेटर को गिराकर तोड़ दिया। इससे डाउन रेल ट्रैक ठप हो गया और शताब्दी एक्सप्रेस टूंडला रेलवे स्टेशन पर ही खड़ी रह गई। हाथरस से आई टावर वैगन की टीम ने लगभग पौन घंटे की मेहनत के बाद नया इन्सुलेटर लगाकर रेल ट्रैक को सुचारू किया। इसके बाद ही शताब्दी एक्सप्रेस को गंतव्य के लिए रवाना किया जा सका।  

सोमवार की सायं टूंडला-दिल्ली रेलखंड के चमरौला रेलवे स्टेशन के निकट एक बंदर ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन से होकर गुजर रहा था। अचानक हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ जाने के कारण वह मर गया। बंदर तारों के बीच लगे इन्सुलेटर पर आ गिरा। इससे इन्सुलेटर टूटकर नीचे आ गया और डाउन रेल ट्रैक की ओएचई में बह रहा करंट बंद हो गया। ऐसे में डाउन रेल ट्रैक पर दौडम् रहीं ट्रेनें जहां की तहां खड़ी हो गईं।

घटना की जानकारी जब मुख्य नियंत्रण कक्ष टूंडला में बैठे रेल अधिकारियों को हुई तो आनन-फानन में डाउन रेल ट्रैक पर आ रही लखनऊ -नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस को टूंडला रेलवे स्टेशन पर ही खड़ा कर दिया गया। जबकि अन्य ट्रेनों को पिछले रेलवे स्टेशनों पर खड़ा कराया गया। इसके बाद हाथरस रेलवे स्टेशन से टावर वैगन की टीम को घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए गए।

टीम के पहुंचने के बाद नया इन्सुलेटर लगाने का कार्य लगभग पौन घंटे में पूर्ण हो सका। इसके बाद ही शताब्दी एक्सप्रेस को गंतव्य के लिए रवाना किया गया। इस दौरान शताब्दी एक्सप्रेस आधे घंटे तक टूंडला रेलवे स्टेशन पर ही खड़ी रही।

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