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आपराधिक लापरवाही

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाके में नसबंदी कैंप में 15 महिलाओं की मौत हो गई और अनेक औरतों की हालत नाजुक बनी हुई है। यह बहुत दुखदायी घटना है। इस घटना से स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों का पता चलता है। इससे पहले भी अनेक नसबंदी कैंपों में स्त्री-पुरुषों की मौतें होती रही हैं। इस संबंध में नियम और कानून पहले से ही बने हुए हैं, पर इनका पालन नहीं होता है। जो भी नियम-कानून बने हुए हैं,  उनका पालन होना चाहिए और जो दोषी हैं,  उनको उचित सजा मिलनी ही चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया,  तो लोगों का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। इसकी कीमत सरकार और समाज को चुकानी पड़ सकती है। जनता को बहुत जागरूक होने की जरूरत है।
नवीनचंद्र तिवारी,   रोहिणी, दिल्ली-85

याद आए नेहरू

देश पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी 125वीं जयंती पर याद कर रहा है। पंडित नेहरू के विचारों की प्रासंगिकता आज फिर बढ़ गई है। देश में गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश-बिहार तक यहां-वहां सांप्रदायिक दंगे भड़कने लगे हैं। और इसके पीछे किनका हाथ है,  यह भी देश के लोग बखूबी जानते हैं। लेकिन मतदाताओं के हाथों से तोता अब पांच साल के लिए उड़ चुका है और वे तब तक कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में,  हर देशवासी को अपने पहले प्रधानमंत्री के विचारों को गहराई से समझना होगा। वह कितने समन्वयवादी और उदार थे,  इन गुणों को अपने आचरण में हमें भी उतारना होगा,  तभी भारत की खूबसूरती बची रह सकेगी।
अवधेश यादव,  पुनाइचक,  पटना  

सबके लिए शौचालय

यह कहना बहुत आसान है कि गरीबों के घर में भी शौचालय होना चाहिए। सच्चाई यह है कि जो लोग झोंपड़पट्टियों में रहते हैं,  वे अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं,  तब जाकर किसी तरह से अपना घर चला पाते हैं,  दो जून की रोटी जुटा पाते हैं। उनके पास इतना पैसा कहां है,  जो वे इस ओर ध्यान दें? हमारे देश में अनगिनत करोड़पति हैं,  यदि वे लोग दानस्वरूप गरीबों के लिए एक-एक शौचालय बनवा दें,  तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
प्रेम श्रीवास्तव
premsrvs37@gmail.com

विषवमन करते लोग

आजकल सभी सोशल मीडिया के खुमार में डूबे नजर आते हैं। लेकिन इसका दुरुपयोग न हो,  यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। देखा जा रहा है कि फेसबुक और व्हॉट्स ऐप के जरिये भड़काऊ बातें शेयर करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। पिछले दिनों बिजनौर,  इटावा में ऐसी घटनाएं घटी थीं। हाल ही में ठाणे में एफबी पर बाबा साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणी से बवाल होते-होते बचा। ऐसी गतिविधियों में लिप्त लोगों को इन साइटों पर हमेशा के लिए बैन किया जाना चाहिए।
सचिन कुमार कश्यप,  शामली,  यूपी

छात्रसंघ चुनावों को रोकें

जिन छात्रों के हाथों में किताबें,  कलम और कॉपी होनी चाहिए,  उन हाथों में उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने राजनीतिक पार्टियों के झंडे और बैनर पकड़ा दिए। अपना भविष्य बनाने के लिए डिग्री कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने के बाद छात्र किसी नेता के नाम का जिंदाबाद या मुर्दाबाद कर आपस में गोली चलाएं,  तो वह प्रदेश भला क्या विकास करेगा?  यही हाल दिल्ली यूनिवर्सिटी का भी है,  जहां छात्र देश के भविष्य की चिंता न करके किसी राजनीतिक दल के भविष्य के प्रति अधिक उत्तरदायी बनते जा रहे हैं। अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल करनी चाहिए कि शिक्षा की दुकान या मंदिर कहे जाने वाले डिग्री कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगाई जाए। ऐसा इसलिए आवश्यक हो गया है,  ताकि लड़कपन में शुरू हुई रंजिश आगे जाकर जानलेवा न बन सके।
शाजिया खान,  खैरनगर,  मेरठ

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