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बगैर नेट पास पीएचडी डिग्रीधारियों को बड़ी राहत

बगैर नेट पास पीएचडी डिग्रीधारियों को बड़ी राहत

पीएचडी कर चुके ऐसे अभ्यर्थी जो यूजीसी-नेट पास नहीं कर पाए हैं, उन्हें पटना हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन देने की छूट दे दी है। साथ ही बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को उनके आवेदनों को मंजूर करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने यूजीसी के 2009 रेगुलेशन के पहले पीएचडी कर चुके अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकृत करने का निर्देश आयोग को दिया है। वहीं मामले में तीन हफ्ते के भीतर बीपीएससी और चांसलर को जवाब देने को कहा है। जस्टिस रमेश कुमार दत्ता व जस्टिस डॉ. रवि रंजन की खंडपीठ ने एक साथ चार मामलों की सुनवाई कर अंतरिम आदेश दिया। मामले की सुनवाई अब तीन हफ्ते बाद होगी। कोर्ट ने बीपीएससी से आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने को भी कहा है।

कोर्ट को बताया गया कि यूजीसी रेगुलेशन के तहत नेट उत्तीर्ण छात्र ही पीएचडी कर सकते हैं। यूजीसी ने पूर्व में पीएचडी कर चुके और पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके छात्रों को नेट करने से छूट दी थी। लेकिन राज्य सरकार के निर्देश पर बीपीएससी ने सहायक प्रोफेसर के 3400 पदों के लिए जो विज्ञापन निकाला, उसमें पीएचडी कर चुके अभ्यर्थियों को कोई छूट नहीं दी है। विज्ञापन के अनुसार जो नेट पास हैं और पीएचडी की डिग्री ले चुके हैं, उन्हें ही नियुक्ति में लाभ मिलेगा।

अदालत में केंद्र और यूजीसी के वकील ने कहा कि देश के विभिन्न हाईकोर्ट ने बगैर नेट पास पीएचडी डिग्रीधारकों को सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में राहत नहीं दी है। चांसलर के वकील ने जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए कोर्ट से तीन सप्ताह का समय मांगा। वहीं, बीपीएससी के वकील ने प्रकाशित विज्ञापन कोई फेरबदल नहीं करने का अनुरोध कोर्ट से किया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि देश के कई हाईकोर्ट ने पीएचडी डिग्रीधारियों को नेट पास नहीं करने की छूट दी है।

कोर्ट ने इसी को आधार बनाते हुए फिलहाल उन छात्रों को आवेदन करने की छूट दी जो पीएचडी कर चुके हैं, लेकिन नेट पास नहीं कर सके हैं।

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