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राज-उद्धव ठाकरे के करीब आने की संभावना बढ़ी

राज-उद्धव ठाकरे के करीब आने की संभावना बढ़ी

दिवगंत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर सोमवार को आदरांजलि अर्पित करने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे शिवाजी पार्क पर पहुंचे और फिर अपने चचेरे भाई एवं शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ बैठकर लगभग 10 मिनट तक चर्चा की। इसके बाद दोनों भाइयों के साथ आने की संभावना एक बार फिर बढ़ती दिखाई देने लगी है।

बीते दो महीनों के भीतर दो ऐसे पारिवारिक मौके आए जब दोनों भाई एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहे। सीनियर ठाकरे की पुण्यतिथि से पहले राज की बेटी उर्वशी का हाल जानने के लिए उद्धव दो घंटे तक हिन्दुजा अस्पताल में थे। इस मिलन से यह संकेत मिल रहा है कि उनके बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी मिट सकती है। उद्धव और राज के मामा चंदू वैद्य ने भी काफी विश्वास के साथ कहा है कि दोनों भाई साथ आएंगे।

उद्धव और राज की जब भी मुलाकात होती है तो राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा बढ़ जाती है कि दोनों भाई साथ आने वाले हैं। हालांकि, उनको मिलाने के भी कई प्रयास हो चुके हैं। मगर अब तक दोनों साथ नहीं आए हैं। सीनियर ठाकरे की पुण्यतिथि पर जिस अंदाज में उद्धव और राज ने प्यार से हाथ मिलाया और साथ बैठे, उससे शिवसेना और मनसे के नेताओं का भी विश्वास बढम है कि दोनों भाई साथ आएंगे और इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया हलचल पैदा हो सकता है।

शिवसेना नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ शिंदे ने कहा है कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक मुलाकात है। महाराष्ट्र की भलाई के लिए दोनों भाई एक होते हैं तो आनंद होगा। मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने भी कहा है कि उद्धव और राज साथ आएं, ऐसी मराठी लोगों की इच्छा है। उन्होंने कहा कि यह दुख की घड़ी है। लेकिन इसके बाद सुख के क्षण आएं, इसके लिए दोनों भाइयों को साथ आने पर विचार कराना चाहिए। पुराने शिवसैनिक और एनसीपी नेता छगन भुजबल ने भी विश्वास जताया है कि उद्धव और राज साथ होते हैं तो वो सत्ता में आ सकते हैं।

उद्धव और राज के बीच ऐसे समय में मुलाकात हो रही है जब शिवसेना और भाजपा का 25 साल पुराना गठबंधन टूट चुका है और महाराष्ट्र में अपने पुराने साथी भाजपा की सरकार के सामने शिवसेना विपक्ष की भूमिका निभा रही है। विधानसभा चुनाव में राज को सफलता नहीं मिली। उनकी पार्टी का एक उम्मीदवार विधायक बन पाया है। अब आने वाले दिनों में बीएमसी और नगरपालिकाओं के चुनाव होने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर उद्धव और राज साथ होते हैं तो बीएमसी और नगरपालिकाओं के चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

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