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वयोवृद्ध नारायण सान्याल को मिल गई है जमानत

कई नक्सली कांडों के सूत्रधार माने जानेवाले नारायण सान्याल को जमानत मिल गई है। यह दिगर है कि जमानत के बाद भी वे जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग से बाहर नहीं निकल पाये। 80 वर्ष के नारायण सान्याल आठ साल से जेल में है। वर्ष 2006 के दिसंबर माह में छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एक किराये के मकान से उसकी गिरफ्तारी हुई थी।

हालाकि, आंध्रप्रदेश पुलिस ने भद्राचलन से उन्हें गिरफ्तार दिखाया। रायपुर में भी नक्सली साहित्य रखने और अन्य मामलों में एक एफआइआर दर्ज हुई थी, जिसमें डॉ विनायक सेन और पीयूष गोहा आरोपी थे। इन दोनों मामलों में सान्याल को जमानत मिल चुकी है। इस बीच गिरिडीह के पीरटांड़ थाना में दर्ज एक मामले में उन्हें झारखंड लाया गया और वे हजारीबाग जेल में बंद है। इस मामले में भी वर्ष 2012 में सान्याल को जमानत मिल गई है।

जमानत की सूचना मिलने पर जेल प्रशासन ने जेल के अंदर रेड करवाया और उनके सेल से एक मोबाइल बरामद होने की बात कही और हजारीबाग के सदर थाना में एक मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें कई गंभीर धाराओं का उपयोग हुआ। इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। उधर आंध्रप्रदेश कोर्ट ने भी जमानत दे दी है। अब सान्याल के बाहर निकलने का रास्ता साफ हो गया है।

हालांकि चर्चा यह है कि सान्याल जेल से बाहर न निकल पाये, इसकी तैयारी भी प्रशासन कर चुका है। हजारीबाग जेल में अधिवक्ता ललित यादव और श्याम कुमार सिन्हा जमानत का आर्डर लेकर गए थे, जिसे लेने से जेल प्रशासन ने इनकार कर दिया। रविवार को इंग्लैंड से सान्याल की बहन उनसे मिलने पहुंची थी। सान्याल ने अपनी बहन से कहा था कि शायद उन्हें साजिश के तहत किसी मामले में फंसाया जा सकता है।

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