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ब्याज दरें घटाने से अर्थव्यवस्था को बेहतर प्रोत्साहन: जेटली

ब्याज दरें घटाने से अर्थव्यवस्था को बेहतर प्रोत्साहन:  जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की वकालत की है। उन्होंने कहा कि कर्ज सस्ता होने से अर्थव्यवस्था को अच्छा प्रोत्साहन मिलेगा। सिटी निवेशक सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि इस बात को लेकर मैं पूरी तरह स्पष्ट हूं कि पूंजी की लागत नीचे आनी चाहिए।

महंगाई घटी है,  वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम नीचे आये हैं। ऐसे में यदि बेहद पेशेवर संगठन रिजर्व बैंक अपने विवेक से पूंजी की लागत घटाने का फैसला करता है,  तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि एक पेशेवर संगठन के रूप में रिजर्व बैंक सर्वश्रेष्ठ निर्णय लेगा। इसी कार्यक्रम में मौजूद रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस एस मुंदड़ा ने कहा कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में संशोधन करता है,  लेकिन वह यह काम लोकप्रिय मांग के आधार पर नहीं किया जाता है। यह तभी होता है,  जब उसे पूरा विश्वास होता है।

एक अन्य कार्यक्रम में मुंदड़ा ने कहा कि रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों पर फैसला करने से पहले विभिन्न आर्थिक पहलुओं को देखेगा। रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिये महत्वपूर्ण नीतिगत दर (रेपो) को इस साल जनवरी से आठ प्रतिशत पर कायम रखा हुआ है। केंद्रीय बैंक अपनी अगली मौद्रिक समीक्षा दो दिसंबर को पेश करेगा।

इस बीच, खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर में घटकर 5.52 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई। वहीं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पांच साल के निचले स्तर 1.77 प्रतिशत पर आ गई है। चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 5.4 से 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो इससे पिछले दो वित्त वर्षों में पांच फीसदी से नीचे रही थी।

वित्त मंत्री ने पाइपलाइन में विभिन्न आर्थिक सुधारों की जानकारी देते हुए विशेष  रूप से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व बीमा संशोधन विधेयक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीमा संशोधन विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पारित होने की उम्मीद है। वित्त मंत्री ने कहा कि वह संसद की प्रवर समिति के संपर्क में हैं,  जो फिलहाल बीमा विधेयक की समीक्षा कर रही है।

वह समिति से अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द देने को कहेंगे। जीएसटी के बारे में जेटली ने कहा कि उनकी विभिन्न राज्य सरकारों के साथ बातचीत चल रही है और ज्यादातर मुद्दों को पहले ही सुलझाया जा चुका है। जेटली ने कहा कि वह जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने से पहले इसके मसौदे की जानकारी राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को देंगे। विभिन्न राज्यों में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति न बन पाने की वजह से जीएसटी को लागू करने की समय सीमा कई बार निकल चुकी है।

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