DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राष्ट्रपति ने की दुनिया के सबसे ऊंचे चंद्रोदय मंदिर की नींव की स्थापना

दुनिया के सबसे ऊंचे चंद्रोदय मंदिर का निर्माण अनंत शेषनाग के फन पर होगा। 700 फुट ऊंचे विशालकाय मंदिर के निर्माण के लिए शनिवार को इसकी नींव रखी गई। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राज्यपाल राम नाईक के साथ मंदिर की नींव में अनंत शेषनाग की स्थापना पूजा की।


शिलान्यास कार्यक्रम के लिए वृंदावन पहुंचे राष्ट्रपति ने दूर खड़े सूबे के राज्यपाल राम नाईक को अपने पास बुलाया और साथ मिलकर पवित्र नदियों के जल से शेषनाग का अभिषेक कर स्थापना पूजा की। इसके उपरांत दोनों मंच की ओर गए। चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष मधुपंडित दास और चंचलापति दास ने बताया कि अनंत शेषनाग स्थापना पूजा मंदिर की नींव के नीचे अनंत शेषनाग को स्थापित करने का समारोह है। वेदों में वर्णित है कि अनंत शेषनाग के फन पर ही पूरी सृष्टि टिकी है। इसलिए श्रीकृष्ण का यह मंदिर अनंत शेषनाग के फन पर बनाया जाएगा।


राष्ट्रपति, राज्यपाल और कारागार मंत्री अक्षयपात्र से कड़ी सुरक्षा के बीच परिक्रमा मार्ग होते हुए वीआईपी पार्किंग पहुंचे। यहां से चारों तरफ से कवर्ड मंदिर की गली में गोल्फ कार्ट से बांकेबिहारी मंदिर के गेट नंबर एक पर पहुंचे। सभी ने 12:55 बजे मंदिर में प्रवेश किया और ठाकुरजी के दर्शन किए। कुंजबिहारी अष्टक के सुमधुर बोलों के मध्य राष्ट्रपति ने प्रभु का पूजन किया। पूजन के लिए चांदी की थाली में केसर, चंदन, इत्र, के अलावा मोतियों का हार भी था। राष्ट्रपति ने इसे प्रभु का अर्पित किया।

मंदिर में यथार्थ होंगी कृष्ण की शिक्षाएं
 चंद्रोदय मंदिर न सिर्फ दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर होगा वरन मंदिर में श्रीकृष्ण की शिक्षाओं की व्यावहारिक सीख भी मिलेगी। मंदिर की प्रत्येक मंजिल पर श्रीकृष्ण से जुड़ी लीलाओं और शिक्षाओं को प्रामाणिक और तर्कसंगत रूप से प्रस्तुत करने की योजना है। लोग श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को न सिर्फ श्रीमद्भागवत और भगवद गीता पढ़कर जान सकेंगे बल्कि यथार्थ में सीख भी सकेंगे।


वृंदावन दुनिया को देगा शांति और समरसता का संदेश

चंद्रोदय मंदिर के निर्माण से वृंदावन पूरी दुनिया को शांति और समरसता का संदेश देगा। वृंदावन को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाने के केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास सराहनीय हैं। भारत सांस्कृतिक रूप से बहुत धनी है। ब्रज वह भूमि है, जो पूरी दुनिया को सांस्कृतिक संदेश देती है।

यह बातें
चंद्रोदय मंदिर के निर्माण के पूजन में शामिल होने के बाद अक्षय पात्र परिसर में एक समारोह को राष्ट्रपति ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यहां बनने जा रहा चंद्रोदय मंदिर वैदिक ज्ञान से दुनिया को जोड़ने का प्रयास करेगा। यह आधुनिक शिल्प और प्राचीन परंपरा के संगम का प्रतीक बनेगा।


उन्होंने इस्कान के प्रवर्तक एसी भक्ति वेदांत स्वामी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति की ध्वजा विदेशों में भी फैलाई। चैतन्य महाप्रभु के 500 वर्ष पूर्व वृन्दावन आगमन को एक महत्वपूर्ण घटना बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपने छह शिष्यों को ब्रज के उन स्थलों की खोज करने को कहा था जहां पर श्रीकृष्ण ने लीलाएं की थीं। उनका कहना था कि यह ब्रज संस्कृति का जीवंत नमूना होगा, जहां पर रासलीला, गीता और भागवत के प्रवचन, ब्रज के वन-उपवन आदि की जानकारी उपलब्ध होगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:राष्ट्रपति ने की दुनिया के सबसे ऊंचे चंद्रोदय मंदिर की नींव की स्थापना