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बढ़ती बाल मजदूरी

हमारी संस्कृति किसी को गुलाम बनाने वाली नहीं है। फिर भी देश में न जाने क्यों बाल मजदूरी के मामले आते रहते हैं?  देश में चुनाव के समय किसी भी राजनीतिक पार्टी का ध्यान इस ओर नहीं जाता,  क्योंकि ये बाल मजदूर नेताओं के वोट बैंक नहीं होते हैं। जाहिर है,  वोटों का लोभ छोड़कर नेताओं को देश के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा बताया जा रहा है कि बाल मजदूरों की तादाद में कोई विशेष कमी नहीं आई है। कुछ लोग अपने हित और लालच में बच्चों के जीवन को अंधकारमय बना रहे हैं। उन्हें रोकना होगा। लेकिन हम लोग देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। एक दिन हम सबके लिए बाल मजदूरी अभिशाप बन जाएगी। तब कैसे अपना देश भारत महान कहलाएगा?
अजय बघेल,  सरोज नगर,  अलीगढ़
ajaysaagar003@gmail.com 

स्वच्छता को आदत बनाएं

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान में कई नामी-गिरामी हस्तियों के साथ आम जन ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बेशक,  प्रधानमंत्री का यह प्रयास काबिल-ए-तारीफ है। अगर इस अभियान को सफल बनाना है,  तो हमें स्वच्छता को अपनी आदत में शुमार करना होगा। जिस तरह से हम अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं,  ठीक वैसे ही हमें अपने आस-पड़ोस को भी साफ रखना होगा। हमें सफाई का दायरा अपने घर से एक या दो किलोमीटर बढ़ाना होगा,  क्योंकि मीलों का सफर कुछ फासलों से ही पूरा होता है।
मंसूर आलम, अलीनगर बाजार,  मुगलसराय
mohdmansoor14@gmail.com

विरासत पर दावे

कुछ लोग ऐसे होते हैं,  जो किसी एक वर्ग,  समुदाय,  राजनीतिक पार्टी या खानदान विशेष के नहीं होते,  बल्कि वे पूरे देश के होते हैं। गांधी,  नेहरू,  सुभाषचंद्र बोस और सरदार पटेल आदि ऐसे ही व्यक्तित्व थे,  जो पूरे देश की साझा विरासत हैं। परंतु कांग्रेस इन्हें केवल अपना नेता समझती है। ऐसा मानकर वह इन नेताओं का अपमान ही कर रही है। वास्तव में,  ये कांग्रेस के नेता नहीं,  बल्कि देश के नेता थे। पिछले दिनों सरदार पटेल और नेहरूजी के जन्मदिवस पर कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का जो रवैया रहा,  वह अफसोसनाक है। कांग्रेस का यह कहना है कि उसने केवल उन्हीं नेताओं को इस आयोजन के लिए आमंत्रित किया है,  जिनका लोकतंत्र में विश्वास है,  एक हास्यास्पद बात है।
राजेंद्र प्रसाद गोयल, फरीदाबाद
goyalrp68@yahoo.com

कांग्रेस की मुश्किलें

इन दिनों देश में कांग्रेस सिमट रही है। जो कभी पूरे देश में छाई रहती थी,  वह आज क्षेत्रीय पार्टी जैसी बनकर रह गई है। ऐसा क्यों? क्योंकि यूपीए सरकार में कई सारे घोटाले हुए। इससे पार्टी की काफी किरकिरी हुई। इसी चक्कर में पार्टी ने एक दिन पहले ही पंडित नेहरू को याद किया,  क्योंकि उसे डर था कि इस अवसर को भी भाजपा न भुना ले। यह कांग्रेस की दयनीय सोच का जीता-जागता उदाहरण है।
अवधेश कुमार राय, धनबाद,  झारखंड
awadheshrai8@gmail.com

कम हुई महंगाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार बनाने के बाद मतदाताओं से किए वादे पूरे किए हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार बनने पर महंगाई कम करने के प्रयास तेज होंगे। उन्होंने प्रयास किया और अब उनकी मेहनत रंग लाने लगी है। पेट्रोलियम और गैर-पेट्रोलियम उत्पादों के दाम घट गए हैं। सोना-चांदी के दामों में भी भारी गिरावट आई है। लेकिन डीजल के दाम घटने के बाद भी ट्रांसपोर्ट कंपनियों और राज्य सरकार में निगम की बसों के किराये कम नहीं हुए हैं। अब इस दिशा में राज्य सरकार को प्रयास करने होंगे। अगर इस दिशा में काम हुए, तो महंगाई और कम हो जाएगी,  जिससे देश की जनता को और भारी राहत मिलेगी।
दिनेश गुप्त, पिलखुवा,  उत्तर प्रदेश

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