DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आपके दिमाग की फैक्टरी का माल है कितना खरा

हमारा दिमाग विचारों की फैक्टरी है। इसमें हर वक्त कोई न कोई विचार बनता रहता है। इस काम के लिए हमारे पास दो बड़े माहिर सेवक हैं। आप भी लीजिए कभी इनकी परीक्षा..

पहले सेवक का नाम है मिस्टर विजय, दूसरे सेवक का नाम है-मिस्टर पराजय। मि. विजय का काम है आपके आदेशानुसार सकारात्मक विचार का निर्माण करना और मि. पराजय का काम है आपके आदेशानुसार नकारात्मक विचार का निर्माण करना। ये सेवक इतने निपुण हैं कि आपके इशारे को समझ बिना वक्त गंवाए अपना काम शुरू कर देते हैं। मि. विजय इस बात के विशेषज्ञ हैं कि आप चीजों को क्यों कर सकते हैं? आप क्यों सफल हो सकते हैं? मि. पराजय बताते हैं कि आप चीजों को क्यों नहीं कर सकते हैं? क्यों असफल हो सकते हैं?  आप सोचते हैं कि मेरा जीवन क्यों अच्छा है तो तुरंत मि. विजय इसे सही साबित करने के लिए दिमाग में ऐसे सकारात्मक विचार पैदा करने लगते हैं,  जो आपके अब तक के अनुभव से जुड़े होते हैं,  जैसे मेरे पास अच्छा परिवार है,  मुझे कितने लोग चाहते हैं, मेरी आर्थिक स्थिति खुश रहने लायक है आदि। इसके विपरीत जब आप सोचते हैं कि मेरा जीवन अच्छा क्यों नहीं है तो तुरंत मि. पराजय इस बात को सही साबित करने के लिए दिमाग में नकारात्मक विचार पैदा करने लगते हैं, जैसे मैं जीवन में कुछ खास नहीं कर पाया,  मेरे साथ बुरा होता है आदि।

ये दोनों सेवक सेवाएं देते हैं,  यह आप पर निर्भर है कि आपको किसकी सेवाएं चाहिए। याद रखें कि जिसको जितना काम देंगे वो उतना ही मजबूत होता जाएगा और एक दिन फैक्टरी पर कब्जा कर लेगा। दूसरे सेवक को निकम्मा कर देगा। यह आप पर है कि आप किसका कब्जा चाहते हैं। जैसे जब लगे कि रिश्तों में कुछ तनाव आ रहा है तो खुद से कहें कि मुझे कितना प्यार करने वाले लोग मिले हैं और बस आगे का काम मि. विजय कर देगा। रिश्तों से जुड़े सुखद अनुभव सामने आते चले जाएंगे और कुछ देर में मूड ठीक हो जाएगा। सारी खटास निकल जाएगी। अत: जब भी लगे कि नकारात्मकता हावी हो रही है तो तुरंत विपरीत विचार मन में लाएं। मि. विजय से उल्टा प्रश्न करें,  बस ध्यान रखें कि प्रश्न सकारात्मक होना चाहिए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आपके दिमाग की फैक्टरी का माल है कितना खरा