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इकाइयां बंद होने से पहले से चल रही है बिजली किल्लत

हरदुआगंज और ओबरा बिजलीघरों के उत्पादन में गिरावट से एक बार फिर उत्पादन निगम का बिजली उत्पादन लड़खड़ा गया है। 4923 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों से 2600 मेगावाट के आसपास उत्पादन रह गया। निजी क्षेत्र के अनपरा-सी और रोजा बिजलीघरों ने लगभग पूर्ण क्षमता से उत्पादन कर हालात सम्भाले। फिर भी दो हजार मेगावाट से ऊपर की अघोषित कटौती करनी पड़ी।

इस बीच जल विद्युतगृहों से भी उत्पादन में गिरावट के कारण हालात सम्भलने में परेशानी हुई। सिस्टम कंट्रोल के मुताबिक कोयला किल्लत से ऊंचाहार की एक इकाई और अनुरक्षण के लिए एनटीपीसी के ही सिंगरौली व टांडा की एक-एक इकाई बंद होने की वजह से भी दिक्कत हुई।

कोयला किल्लत से 12 नवम्बर से बंद पारीछा बिजलीघर की 210 मेगावाट की चौथी और एनटीपीसी रिहन्द बिजलीघर की 7 नवम्बर से बंद छठी इकाई शनिवार को उत्पादनरत करने के बावजूद ओबरा और हरदुआगंज बिजलीघर के उत्पादन में गिरावट से सूबे में अघोषित बिजली कटौती जारी रही। 4923 मेगावाट के उत्पादन निगम के बिजलीघरों से महज 59.6 मिलियन यूनिट बिजली हासिल हो सकी।

निजी क्षेत्र के 2850 मेगावाट के तीनों बिजलीघरों में लैंको अनपरा-सी ने लगभग पूर्ण क्षमता से 963 मेगावाट (23.10 मियू.) रोजा ने 1033 मेगावाट (24.80 मियू.) और बजाज एनर्जी ने 350 मेगावाट (8.4 मियू.) बिजली की आपूर्ति कर लगभग 56.3 मियू. बिजली देकर हालात सम्भाले। हालांकि तापमान में गिरावट से बिजली की मांग लगभग 260 मिलियन यूनिट तक सिमट गयी है।

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