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रेलवे बना सकता है अपने लिए पर्यावरण निदेशालय

रेलवे बना सकता है अपने लिए पर्यावरण निदेशालय

रेल मंत्रालय पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अलग से एक निदेशालय स्थापित कर सकता है क्योंकि विभाग के नए मंत्री सुरेश प्रभु सौर और पवन ऊर्जा जैसे हरित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहते हैं।
   
विभाग की प्रस्तावित नई इकाई पर्यावरण प्रबंधन निदेशालय से रेलवे की भूमि पर फलदार वक्ष लगाए जाने और एक बड़े स्वरूप में जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। वर्तमान में रेलवे के पास करीब दो दर्जन निदेशालय हैं और तथा इस नए निदेशालय के अस्तित्व में आने से इस संख्या में और इजाफा हो जाएगा।
   
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसार के लिए एक समर्पित निदेशालय की संभावना तलाश रहे हैं क्योंकि नए रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेलवे में हरित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं।
   
प्रभु ने रेलवे में बदलाव लाने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। इनमें एक पहल ऐसी भी है जिसके तहत समय पर परियोजनाओं को पूरा करने वाले तथा रेलवे के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने वाले रेल कर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
   
अधिकारी के अनुसार कुल ऊर्जा का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा जैव डीजल के अतिरिक्त सौर एवं पवन जैसे गैर परंपरागत और नवीकरणीय ऊर्जा माध्यमों से उत्पन्न करने के लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। भारतीय रेलवे को हर साल बिजली और डीजल पर करीब 28, 500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

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