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महाराष्ट्र में दोस्त से दुश्मन बने दल क्या केंद्र में रहेंगे साथ

महाराष्ट्र में दोस्त से दुश्मन बने दल क्या केंद्र में रहेंगे साथ

अगले सप्ताह से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र पर सबकी निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि महाराष्ट्र में दोस्त से दुश्मन बने दल केंद्र में सहयोगी बने रहते हैं या नहीं। विचारधारा के आधार पर भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना महाराष्ट्र में विपक्षी दल की बेंचों पर बैठी है जबकि उसका उम्मीदवार नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का सदस्य है।
    
यहां दिलचस्प बात यह है कि संसद के सत्र से पहले शरद पवार की राकांपा महाराष्ट्र में भाजपा के नए सहयोगी के रूप में सामने आई है जबकि दिल्ली में यह कांग्रेस के नेतृत्व वाले संप्रग का दूसरा सबसे बड़ा घटक है।
    
शिवसेना के प्रवक्ता एवं राज्यसभा में पार्टी के नेता संजय राउत ने बताया, हमने अपनी भविष्य की कार्ययोजना पर कोई फैसला नहीं किया है। कई मुद्दों पर असहमति है। कुछ मुद्दों पर हमारे मतभेद हैं।
    
शिवसेना में सत्ता हासिल करने या विपक्ष में बैठने के मुद्दे पर खींचतान जारी प्रतीत होती है। पार्टी का एक धड़ अब भी चाहता है कि शिवसेना भाजपा के साथ सत्ता में भागीदार बने जबकि दूसरा धड़ चाहता है कि पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाए।

विज्ञप्ति के अनुसार मुंबई तट से 80 से 90 किलोमीटर दूर मुक्ता, बासीन और पन्ना क्षेत्र को नये सिरे से विकसित करने और उसकी आयु बढ़ाने के लिये ताजा निवेश किया जायेगा। बढ़ा हुआ गैस उत्पादन इसी वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है। वर्ष 2017-18 तक क्षेत्र से एक करोड़ घनमीटर प्रतिदिन गैस, 950 बैरल तेल और 1,100 मीटर प्रतिदिन संघनन की प्राप्ति होगी।
  
क्षेत्र से गैस उत्पादन बढ़ाने के लिये इससे पहले 1999 और 2007 में भी विकास कार्य किया गया। तब इसमें बूस्टर कंप्रेस्सर लगाये गये। तीसरे चरण में इसमें और सुधार किया जायेगा। इसमें 18 कुओं की खुदाई होगी जिसमें 5 कुऐं उथले समुद्री क्षेत्र में होंगे।
  
क्षेत्र का विकास कार्य होने पर वर्ष 2027-28 तक 19.56 अरब घनमीटर गैस, 19.70 लाख घनमीटर संघनन और 18.30 लाख टन तेल का उत्पादन होगा। गैस और संघनन का इस्तेमाल हजीरा संयंत्र में किया जायेगा।
  
ओएनजीसी को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कच्चे तेल के दाम कम होने की वजह से 5,445 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ जो कि पिछले साल की इसी तिमाही से 10.2 प्रतिशत कम रहा। इस दौरान कुल बिक्री भी 8.8 प्रतिशत घटकर 20,512 करोड़ रुपये रही।

हालांकि इस अभियान पर राकांपा की एक अलग छाप छोड़ने के प्रयास के तहत, पवार ने कुछ दिन पहले पुणे में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था। इस सम्मेलन में उन्होंने यह घोषणा की थी कि महाराष्ट्र में तेजी से फैलते डेंगू के मामलों को ध्यान में रखते हुए उनकी पार्टी के कार्यकर्ता सफाई अभियान चलाएंगे।
    
नई दिल्ली में राकांपा ने कयासों को गलत साबित करते हुए जवाहरलाल नेहरू पर कांग्रेस के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने का फैसला किया है। यह सम्मेलन कल से शुरू हो रहा है। पवार ने त्रिपाठी से इस समारोह में शामिल होने के लिए कहा है और राकांपा के महासचिव ने इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल को पहले ही सूचित कर दिया है।
     
कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा के किसी अन्य नेता को आमंत्रित नहीं करते हुए मोदी के खिलाफ अपने अभियान को जारी रखा है। कांग्रेस मोदी पर आरोप लगाती रही है कि वह स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं को हथियाने का प्रयास कर रहे हैं।
    
पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने पवार को निमंत्रण दिया है। लेकिन राकांपा द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत के दौरान भाजपा को समर्थन दिए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस संशय की स्थिति में थी।

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