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जी-20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने उठाया काले धन का मुद्दा

जी-20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने उठाया काले धन का मुद्दा

कालेधन के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के औद्योगिक रूप से विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी20 के नेताओं से इस समस्या के खिलाफ एकजुट प्रयास करने का आह्वान करते हुए आज कहा कि यह सिर्फ एक आर्थिक ही नहीं बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ी गंभीर चुनौती है।
     
मोदी ने जी20 शिखर बैठक के शुरुआती पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से अनुरोध किया कि दुनिया में जहां कही भी कर चोरी या इससे बचने के रास्ते मौजूद हैं उन्हें खत्म किया जाना चाहिए।
  
उन्होंने कहा कि मैं हर प्रशासनिक व्यवस्था और खासतौर से ऐसे देशों से जहां कर छूट पाने के रास्ते खुले रखे गए हैं, इस बारे में अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत सूचनाएं साझा करने की अपील करता हूं। इस मसले पर नीतिगत सहयोग बेहद जरूरी है।
    
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपसी सहयोग सिर्फ कालेधन ही नहीं बल्कि आतंकवाद, नशीली दवाओं और हथियारों की तस्करी के खिलाफ भी जरूरी है।

मोदी ने कहा कि कालेधन के बारे में सूचनांए साझा करने के लिए वह परस्पर तालमेल से की जाने वाली हर पहल और प्रयासों का समर्थन करते हैं। उन्होंने इसके साथ ही अपनी यह प्रतिबद्धता भी दोहरायी कि वह विदेशी बैंकों में जमा काले धन की पाई-पाई वापस लाकर रहेंगे।
     
उन्होंने कहा कि वह कालेधन के बारे में सूचनाओं के स्वत आदान प्रदान के लिए बनायी गयी नई मानक वैश्विक प्रणाली के हिमायती हैं क्योंकि यह एक ऐसा सशक्त जरिया साबित होगा जिसके रास्ते विदेशी बैंको में जमा बेहिसाब कालेधन के बारे में जानकारी मिल सकेगी और इसे वापस लाया जा सकेगा।
    
प्रधानमंत्री ने इस सच्चाई को स्वीकार करने के बावजूद कि इस मसले पर हर देश की अपनी अलग प्राथमिकताएं हो सकती हैं कहा कि विदेशों में जमा कालेधन के बारे में परस्पर सहयोग भविष्य में सभी देशों के लिए फायदेमंद होगा। 

कर चुकाने से बचने के नए रास्तों को रोकने के लिए जी20 देशों की ओर से 'बेस इरोज़न एंड प्रॉफिट शेयरिंग' के बारे में नए नियमों की रूप रेखा एक ऐसा जरिया होगी जो विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं का समाधान करेगी।
     
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और पूंजी की बढ़ती गतिशीलता के जहां फायदे हुए हैं वही इसका नुकसान भी हुआ है। नुकसान इस मायने में कि इसने कर चुकाने और अर्जित पूंजी के बटवारे से बचने के नए रास्ते खोल दिए हैं।
     
उन्होंने कहा कि जी20 देशों की वित्तीय प्रणाली का लचीलापन साइबर सुरक्षा पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इसलिए इस बारे में भी बहुत गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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