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स्मार्ट हुए उलमा, क्लिक पर खुलता कुरआन

मस्जिद का मेम्बर, कुरान ख्वानी, एक क्लिक करते ही कुरआन की आयतें, हदीस और खुत्बा उलमा के सामने होता है। जी हां उलमा हाइटेक हो गए हैं। हर वक्त पूरे अदब के साथ हाथ में उलमा के हाथों में स्मार्ट फोन रहता है। इससे उन्हें किताब खोलने और देखने की जरूरत नहीं पड़ती और समय की काफी बचत होती है।

मदरसों के छात्र और मस्जिदों के इमाम के साथ दावत-ए-इस्लामी के सदस्य हाइटेक हो गए हैं। कहीं तकरीर के लिए जाना हो, मस्जिद में खुत्बा पढ़ना हो, कुरानख्वानी के साथ कब्रिस्तान तक में स्मार्ट फोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे उलमा के समय की बचत तो है ही साथ ही उन्हें चौबीसों घंटे इंटरनेट से जुड़े रहने का फायदा भी मिलता है। दूसरे देशों में दीनी और दुनियावी तालीम का सिलेबस और तकनीक की भी जानकारी मिल रही है। इससे उन्हें रोजगार से जुड़ने के अवसर के बारे में भी मालूमात हो रही है। तालीम के साथ आधुनिक बनना जरुरी है। उलमा ने तकनीक का सहारा लेते हुए खुदको बदला है और इंटरनेट के जरिए देश-विदेश की तमाम जानकारियां भी जुटाई जा रहीं हैं।

सुन्नतों के मैसेज और तकरीर होती शेयर
मदरसों के छात्र और उलमा ने खुद को हाइटेक किया है। उनके मोबाइल में कुरान के सिपारे, हदीस और अहकामें शरियत से तआल्लुक रखने वाली तमाम किताबें डाउनलोड हैं। उन्हें कोई भी जानकारी करने में पांच मिनट से भी कम लगते हैं। मदरसा जामिया नईमिया के मौलाना महमूद, मौलाना मोहम्मद अनस, मौलाना दऊद, मौलाना सादिक, मौलाना अब्दुल कादिर, मौलाना हारुन, मौलाना सुलेमान, मौलाना सिद्दीक , मौलाना मुस्तफीज नईमी आदि छात्र कुरान ख्वानी, फातिहा और जलसों में स्मार्टफोन साथ लेकर जाते हैं।

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