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गैर आदिवासियों में बांटी खैरात

झारखंड में आदिवासी विकास के पैसे का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। जनजातीयों को मिलने वाली सुविधाएं गैर जनजातियों के बीच बांट दी जाती हैं। राज्य की विभिन्न मेसो परियोजनाओं में एसे कई उदाहरण हैं। मेसो क्षेत्र चाईबासा, जमशेदपुर, खूंटी और रांची में 1.63 करोड़ की परिसपंत्तियां गैर आदिवासियों के बीच बांटी गयीं। आदिवासी परिवारों की आयवृद्धि योजना के तहत 2004-05 में ट्रैक्टर, डीाल ऑटो, छिड़काव सेट, पंप सेट, और हॉलर मशीनें खरीदी गयीं, लेकिन ये गैर आदिवासियों के बीच बांटी गयीं। केंद्रीय सहायता की राशि का दुरुपयोग किया गया। खूंटी मेसो के अफसर तो दो कदम और आगे बढ़ गये। लाभ लेने वालों की सूची में छेड़-छाड़ करते हुए गलत तरीके से और नौ लोगों के नाम जोड़ दिये गये। इन नौ लोगों को 21.4लाख रुपये के पांच ट्रैक्टर और चार पंप सेट दिये गये। इसी तरह मेसो क्षेत्र चाईबासा और चक्रधरपुर में 11दुकानदारों को अनुदान के रूप में 45 हाार कुल 53.55 लाख रुपये दिये गये, जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं थे। वर्ष 2004 से 2006 के बीच चक्रधरपुर, चाईबासा, खूंटी में बागवानी, जलजमाव और माइक्रोलिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए तीन एनजीओ- सृजन महिला विकास मंच को 1.01 करोड़, इंदिरा आदिवासी महिला विकास संस्था को 43 लाख और प्रदान को 75 लाख यानी कुल 2.1रोड़ दिये गये। सृजन तथा इंदिरा विकास संस्था का रािस्ट्रेशन नहीं था और इन्हें ऐसे काम करने का कोई अनुभव नहीं था। मेसे अफसर ने संस्थाओं द्वारा कराये गये काम की जांच नहीं की। कैग की रिपोर्ट में तीनों एनजीओ द्वारा 2.1रोड़ के गबन की आशंका व्यक्त करते हुए पुन: जांच की जरूरत बतायी गयी है।

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