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न्यायाधीशों की पत्नियों ने पारिवारिक विवादों को निपटाने की कोशिश की

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर शनिवार को जिले में पहली बार न्यायाधीशों की पत्नियों ने पारिवारिक विवादों को बातचीत से निबटाने की कोशिश की। पहली ही बार में इस पहल का सकारात्मक प्रभाव भी दिखा। आठ में से दो मामलों का निस्तारण कर दिया गया। अब 6 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में इन दोनों समझौतों का फैसला सुनाया जाएगा।


दरअसल न्यायालयों में बढ़ते मामलों को देखते हुए लोक अदालतों का आयोजन बीच-बीच में होता है। यहां पर सुलह-समझौते के आधार पर दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश होती है और आपसी सहमति से मामला निस्तारित किया जाता रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने देखा कि लोक अदालत में आने वाले कई मामले ऐसे भी हैं जिन्हें सिर्फ जज और वकील की मौजूदगी में निबटाना थोड़ा कठिन होता है। विचार किया गया कि इस तरह के मामलों में ऐसे लोगों को बैठाया जाए जो विवादों को ठीक से समझ सकें। इसी को देखते हुए प्राधिकरण ने लोक अदालत के लिए सूचीबद्ध मामलों में से पारिवारिक विवाद के आठ मामलों को अलग किया। चूंकि ये मामले पति-पत्नी के बीच के हैं इसलिए जजों के साथ ही उनकी पत्नियों को भी बैठाने का विचार किया गया।

प्राधिकरण ने अपने विचारों को मूर्त रूप देते हुए शनिवार को पंडित कमलापति त्रिपाठी महाविद्यालय में अदालत लगाई। इसमें जनपद न्यायाधीश डा. एनके बहल की पत्नी सुषमा बहल, अपर जनपद न्यायाधीश महितक वर्मा की पत्नी कमला वर्मा, परिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायधीश एसएन त्रिपाठी की पत्नी उषा त्रिपाठी, न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय लाल की पत्नी भारती लाल ने दंपतियों के विवादों को सुनना शुरू किया।  

दंपतियों को सामूहिक परिवार के महत्ता व बच्चों के हित में पति-पत्नी का साथ कितना जरूरी है यह भी समझाया गया। सभी के सामूहिक समझाने के ही असर रहा कि अलग-अलग रह रहे वीरेन्द्र गौड़-कृष्णावती और साहब पांडेय-कृष्णावती साथ रहने को राजी हो गए।

अदालत में एक दंपती की लावारिश बच्चाी को गोद लेने की ख्वाहिश भी पूरी की गई। रविन्द्र भल्ला ने अदालत के सामने उस बच्ची को अपनी बेटी बनाया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दिवाकर द्विवेदी के अनुसार सभी न्यायाधीश चाहते हैं कि जिस तरह का विवाद हो उसी तरह के लोगों के सामने उसे हल कराया जाए। इसी को देखते हुए पिछले दिनों वरिष्ठ वकीलों के सामने कई मामलों की सुनवाई हुई। अगले चरण में सेवानिवृत्त शिक्षकों को इसमें शामिल करते हुए सुनवाई की जाएगी।

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