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फेल हो चुका है धरती का सिस्टम

धरती अपनी समस्याओं का खुद ही निपटारा कर लेती है। इसमें ग्लोबल वार्मिग बढ़ा रही गैस कार्बन डाई-ऑक्साइड भी शामिल है। हालाँकि हम यह गैस इतनी तेजी से फैलाने में लगे हैं कि पृथ्वी का हाारों साल पुराना सिस्टम फेल हो गया है। नेचर जियोसाइंस में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस शोध ने सैकड़ों साल पुरानी परिकल्पना को सही साबित कर दिया है।ड्ढr वैसे आज भी ज्वालामुखी से निकलने वाला ज्यादातर कार्बन हवा से चट्टानों के जरिए समुद्र की तलहटी में पहुँच जाता है। वैज्ञानिकों ने इस शोध में अंटार्कटिक के गर्भ से बर्फ के नमूने लिए जो करीब 6.1 लाख साल पुराने थे। इनमें उस जमाने की कार्बन डाई ऑक्साइड भी मौजूद थी और इसकी सांद्रता करीब 22 पीपीएम थी। जबकि मशीनों के आने के बाद यह सांद्रता 100 पीपीएम पहुँच गई यानी कार्बन डाई ऑक्साइड के निकलने की दर पहले से 1400 गुना तेज हो गई। हानोलूलू की हवाई यूनीवर्सिटी के डॉ. रिचर्ड जीबे कहते हैं कि लम्बे समय तक चलने वाला धरती का चक्र इतनी ज्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड को नहीं संभाल सकता है। अब यह सिस्टम ग्रीन हाउस गैस से हमारी रक्षा नहीं कर सकता। वैज्ञानिकों का पहले ही मानना था कि धरती की जलवायु खुद ही कार्बन का स्तर समान बनाए रखती है। इस मॉडल के अुनसार हवा में निकलने वाला कार्बन ज्यादातर ज्वालामुखी से निकलता है और पहाड़ों से होते हुए समुद्र में पहुँच जाती और आखिर में नीचे बैठ जाता है। वैज्ञानिकों ने अंटाकृटिक के डोम कॉनकार्डिया नामक क्षेत्र से बर्फ में फँसे हवा के बुलबुले ढूँढ़े और फिर उसमें मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड के नमूने लिए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने पहाड़ों की चोटियों से कार्बन डाई ऑक्साइड के नमूने एकत्र किए। फिर उन्होंने विभिन्न समयांतरालों के दौरान समुद्र की तलहटी में जमा होने वाली कार्बन की तुलना की। इन आँकड़ों ने साफ कर दिया कि पुरानी परिकल्पना बेहद सही थी।ं

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