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शरीर में ही है एचआईवी से लड़ने का हथियार

वैज्ञानिकों ने हमार ही शरीर में ही एचआईवी से लड़ने का हथियार खोज निकाला है। शरीर की प्रतिरोधी क्षमता के प्रमुख प्रोटीन की मदद से वैज्ञानिकों ने टेस्ट ट्यूब में एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस) को बिल्कुल निष्क्रिय कर दिया।ड्ढr इस वक्त मौजूद सभी दवाएँ वायरस के ही प्रोटीन पर हमला करती हैं। हालाँकि वायरस खुद में दवा से लड़ने के गुण पैदा कर लेता है और दवा बेअसर होने लगती है। इस समस्या पर गौर करने के बाद वैज्ञानिकों ने शरीर की प्रोटीन का इस्तेमाल किया, जिसका नाम इंटरल्यूकिन-2 इंड्यूसिबिल टी सेल काइनेज (आईटीके) है। यह प्रोटीन प्रतिरोधी क्षमता के लिए जिम्मेदार टी कोशिकाओं में पाया जाता है और इन्हें सक्रिय भी रखता है। एचआईवी टी कोशिकाओं पर ही हमला करता है और बीमारियों से लड़ने की ताकत को कम करता रहता है। साथ ही साथ वायरस अपने जसे कई विषाणु पैदा करने में लग जाता है, जो अन्य टी कोशिकाओं को अपनी चपेट में लेते रहते हैं। फिर यह वायरस शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बेकार कर देता है। इस शोध में लगे वैज्ञानिकों ने पाया कि अगर आईटीके प्रोटीन को सक्रिय नहीं होने दिया जाए तो एचआईवी टी कोशिकाओं के बीच सिग्नल भेजने के लिए बने लिंक का उपयोग नहीं कर पाता है और वह या तो निष्क्रिय हो जाता है या फिर संक्रमण की गति धीमी पड़ जाती है। नेशनल ह्यूमन रिसर्च जीनोम इंस्टीटय़ूट और बॉस्टन यूनीवर्सिटी ने मिलकर यह शोध किया है। प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने टी-कोशिकाओं में आईटीके की सक्रियता कम करने के लिए एक रसायनिक और आरएनए इंटरफेरंस का उपयोग किया। आरएनए इंटरफेरंस आनुवंशिक रूप से प्रोटीन की सक्रियता को नियंत्रित करता है। इसके बाद इन टी कोशिकाओं को एचआईवी के साथ रख दिया। इसके वैज्ञानिकों ने वायरस की सक्रियता को परखा। आईटीके निष्क्रिय होने के बाद टी कोशिकाओं में एचआईवी के घुसने की ताकत कम हो गई है। उसका प्राटीन भी नए तरह के वायरस में बदल गया। जबकि इसका टी कोशिकाओं की शक्ति पर कोई असर नहीं पड़ा।

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