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हिंदी सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: प्रणव

हिंदी सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक:  प्रणव

हिंदी भाषा को भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इस भाषा की सरकार तथा लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका है। गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह राजभाषा समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में,  जहां बहुत सी भाषाएं बोली जाती हैं,  हिंदी का अपना विशेष स्थान है। यह हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है और लोगों के बीच की मुख्य संपर्क भाषा है। हिंदी की सरकार तथा लोगों को जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

हिंदी के संवर्धन के लिए विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों को पुरस्कार वितरित करते हुए राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि राजभाषा पुरस्कार लोगों को आगे इस भाषा को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। मुखर्जी ने कहा कि सामाजिक कल्याण योजनाओं और कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि उन्हें लोगों की अपनी भाषाओं में पेश किया जाए।

उन्होंने कहा,  इसलिए,  हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल इस तरीके से किया जाना चाहिए कि विकास योजनाओं की सूचना तथा लाभ आम आदमी तक आसानी से पहुंच सके। राष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि इंटरनेट,  मोबाइल फोन आदि विभिन्न मीडिया में हिंदी लोकप्रियता हासिल कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें हिंदी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के सभी प्रयास करने चाहिए।

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