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सैफ को लगा है नई हीरोइनों का चस्का...

सैफ को लगा है नई हीरोइनों का चस्का...

लीजिए, एक बार फिर छोटे नवाब सैफ अली खान अपनी नई फिल्म के साथ हाजिर हैं। उनकी आने वाली फिल्म का नाम है ‘हैप्पी एंडिंग’ जिसमें उनके किरदार में लाइट कॉमेडी टच देखने को मिलेगा।

बतौर अभिनेता यूं तो सैफ अपनी काबिलियत कई बार दिखा चुके हैं, लेकिन इस बार देखने वाली बात यह होगी कि वो इस फिल्म में नया क्या दिखाते हैं। इसके अलावा एक निर्माता के रूप में वह एक बार फिर चुनौती का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस की रेस में 100-200 करोड़ी क्लब का हिस्सा नहीं बन पातीं।

अपनी इस नई फिल्म में आपने हल्की-फुल्की कॉमेडी की है। क्या अब आप लाउड कॉमेडी फिल्मों से बचने लगे हैं?
मैंने लाउड कॉमेडी फिल्में ज्यादा नहीं की हैं। पिछली फिल्म ‘हमशकल्स’ जरूर ऐसी थी। मुझे लगा था कि दर्शक लाउड कॉमेडी फिल्में पसंद कर रहे हैं, इसलिए हम अपनी फिल्म की सफलता के प्रति आश्वस्त हो चुके थे। सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की थी, लेकिन यह सच्चाई है कि इस फिल्म को पसंद नहीं किया गया। मैंने अपनी कई फिल्मों की असफलता से सबक सीखा है। यही वजह है कि मैं अब काफी सोच-समझ कर फिल्में साइन कर रहा हूं।

इस फिल्म में आपने एक लेखक का किरदार निभाया है। इसके लिए किसी लेखक को फॉलो करने की जरूरत पड़ी?
मैंने वही किया, जो इस फिल्म के निर्देशक राज और डीके ने कहा। किसी रियल कैरेक्टर को कॉपी करने का कोई मतलब नहीं था, क्योंकि यह कोई बायोपिक फिल्म तो है नहीं। इस फिल्म में मेरा जो किरदार है, उसके पास एक मजेदार कहानी है, जिसे मैं इनसिक्योर फील कर रहे बॉलीवुड के एक हीरो को बेचता हूं। बस, यहीं से फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है।

जब आपकी फिल्में फ्लॉप होती हैं तो आप पर कितना असर पड़ता है?
असर तो यकीनन पड़ता है। हर फिल्म के लिए बड़ी मेहनत की गई होती है, उसे वक्त दिया होता है। ऐसे में फिल्म दर्शकों की पसंद पर खरी न उतरे तो मायूस होना लाजिमी है।

लेकिन मैं इस पर विचार जरूर करता हूं कि मेरी अमुक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्यों बैठ गई। अगर किसी फिल्म से दर्शक दूरी बना रहे होते हैं तो उसकी भी वजह होती है। मेरी कोशिश यही होती है कि उस वजह को जाना जाए।

आज की बहुत सारी फिल्मों के टाइटल अंग्रेजी में क्यों रखे जा रहे हैं? क्या हिंदी में अब अच्छे टाइटल नहीं बचे? आपकी फिल्मों के टाइटल भी ज्यादातर अंग्रेजी में ही होते हैं।
इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकूंगा। बस इतना जरूर कह सकता हूं कि जैसे-जैसे वक्त बदला है, वैसे-वैसे फिल्मों के टाइटल भी बदले हैं। दरअसल लोग ऐसे टाइटल पसंद कर रहे हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है। हालांकि हर फिल्म का टाइटल अंग्रेजी में हो, इतना बदलाव भी नहीं आया है। और कई बार ये भी देखा गया है कि फलां फिल्म के साथ अंग्रेजी में रखा गया टाइटल सूट कर रहा है। अब ऐसी किसी स्थिति में किसी फिल्म का टाइटल अंग्रेजी में हो तो किसी को क्या दिक्कत हो सकती है!

रोमांस, कॉमेडी या ड्रामा, आप किस जॉनर की फिल्मों में अपने आपको ज्यादा सहज महसूस करते हैं?
इस सवाल का एकदम सही जवाब मेरे पास नहीं है, फिर भी मुझे लगता है कि मैं रोमांटिक कॉमेडी किरदारों में ज्यादा जंचता हूं। दर्शक भी मुझे ऐसी ही भूमिकाओं में देखना पसंद करते हैं। हालांकि मैंने अपने किरदारों के साथ काफी एक्सपेरिमेंट किए हैं। तरह-तरह के रोल अदा किए हैं। एक एक्टर के रूप में मुझे इसका काफी फायदा भी मिला है।

क्या अब आप नई हीरोइनों के साथ ज्यादा सहज महसूस करने लगे हैं?
ऐसा तो नहीं है। हर हीरोइन की अपनी एक विशेषता होती है। नई हो या पुरानी, किरदार के हिसाब से ही उसका चुनाव किया जाता है। लोगों को यह गलतफहमी है कि फिल्मों में हीरोइनों का चुनाव हीरो की मर्जी से होता है। हां, हीरो और हीरोइन की ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री का जरूर ख्याल रखा जाता है। दर्शकों की पसंद को नकारा नहीं जा सकता।

आज कई नए एक्टर अपने टेलेंट का लोहा मनवा चुके हैं। रणबीर कपूर हों या रणवीर सिंह, वरुण धवन हों या अर्जुन कपूर, नई पीढ़ी के ये एक्टर पुरानी पीढ़ी के एक्टर्स के लिए खतरा बन चुके हैं। आपका क्या कहना है?
मैं स्वीकार करता हूं कि एक्टर्स की नई पीढ़ी बहुत काबिल है। वे हमारी तरह गलतियां नहीं करते या काफी कम करते हैं। वे पूरी तैयारी के साथ आपके सामने आते हैं। वे पहली फिल्म से ही सीख जाते हैं कि क्या करना है और क्या नहीं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि नई पीढ़ी के लोग बेहद प्रोफेशनल हैं। आपने जिन एक्टरों का नाम लिया, वे सभी कमाल के एक्टर हैं। इनका भविष्य उज्ज्वल है। पर नई पीढ़ी के एक्टर पुरानी पीढ़ी के लिए खतरा बन चुके हैं, मैं इस बात को नहीं मानता। यहां नए एक्टरों के लिए भी काफी काम है और सीनियर एक्टरों के लिए भी। बॉलीवुड अब काफी विस्तार ले चुका है। इतना विस्तार कि हमें इसका आभास ही नहीं है।

इधर लगातार कहा जा रहा है कि आपने अपने पार्टनर दिनेश विजान से दूरी बना ली है। आप दोनों के प्रोडक्शन भी अलग हो रहे हैं? सच क्या है?
दूरी बनाने जैसी कोई बात नहीं है। हम दोनों आज भी बहुत अच्छे दोस्त हैं, लेकिन बिजनेस में हमने अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। अब मैं खुद के बैनर तले जो फिल्में बनाऊंगा, वे मेरी सोच के मुताबिक होंगी। मैं कई लोगों के साथ काम करना चाहता हूं। मेरा मानना है कि दिनेश विजान भी इंडस्ट्री को अच्छी फिल्में देंगे।   

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