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क्यों की कुणाल घोष ने गोली खाकर आत्महत्या करने की कोशिश?

क्यों की कुणाल घोष ने गोली खाकर आत्महत्या करने की कोशिश?

सारदा चिटफंड घोटाले के आरोप में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष ने गुरुवार देर रात कोलकाता स्थित प्रेसीडेंसी जेल में नींद की गोलियां खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर है।


घटना की पुष्टि करते हुए पश्चिम बंगाल के सुधारगृह सेवा मंत्री एच ए स्वाफी ने कहा कि जेल में ही डॉक्टर को बुलाया गया था, जिन्होंने सब कुछ सामान्य पाया। इसके बावजूद एहतियातन घोष को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


वहीं, जेल के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि घोष की धमकी के बाद उनपर कड़ी नजर रखी जा रही है। रात को सोने से पहले भी उनकी तलाशी ली गई थी। तब उनके पास कोई दवा नहीं थी। उन्होंने बताया कि देर रात करीब 2:30 बजे घोष ने सांस लेने में समस्या होने की शिकायत की और कहा कि उन्होंने नींद की गोलियां खाई हैं। इसके बाद डॉक्टर को बुलाया गया। बाद में उन्हें अर्धनिद्रा की अवस्था में एसएसकेएम अस्पताल लाया गया। अस्पताल के निदेशक प्रदीप मित्र ने कहा कि घोष को सीसीयू में भर्ती किया गया और पेट की सफाई की गई। पेट से मिले नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

घोष पर आत्महत्या की कोशिश करने का मुकदमा :

क्यों की कोशिश : घोटाले के आरोप में घोष पिछले साल 23 नवंबर से जेल में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि तृणमूल के कुछ अन्य नेता भी इस पूरे घोटाले से लाभांवित हुए हैं। घोष चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।  

अदालत में दी थी धमकी : मामले की सुनवाई कर रहे मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरविंद मिश्र की अदालत में 10 नवंबर को पेश घोष ने आत्महत्या करने की धमकी दी थी। उनका आरोप था कि घोटाले में संलप्ति कुछ प्रभावशाली लोग जांच को प्रभावित कर रहे हैं। अदालत के समक्ष घोष ने कहा था कि अगर उन लोगों के खिलाफ सीबीआई ने तीन दिन के भीतर समुचित कार्रवाई नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेंगे। उन्होंने अपने वकील से मिलने की अनुमति भी मांगी थी।

प्रेसीडेंसी जेल के अधीक्षक निलंबित  : कुणाल घोष के जेल में आत्महत्या करने की कोशिश के सिलसिले में पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रेसीडेंसी जेल के अधीक्षक, जेल के डॉक्टर और उस समय डय़ूटी पर तैनात कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। राज्य विधानसभा में इसकी जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। इसकी अध्यक्षता गृह सचिव बसुदेव बनर्जी करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि आखिर डॉक्टर ने उन्हें नींद की 15 गोलियां क्यों दी। जबकि अनिद्रा की शिकायत होने पर दो या तीन गोलियां दी जानी चाहिए।

जेल अधिकारियों ने सीबीआई करेगी पूछताछ : सीबीआई की विशेष अपराध शाखा ने शुक्रवार को कहा कि वह भी जेल अधिकारियों से इस बाबत पूछताछ करेगी कि घोष तक नींद की दवाईयां कैसे पहुंची। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई घोष तक नींद की गोलियां पहुंचने से चिंतित है और वह जेल अधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेकर एक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करेगी। उल्लेखनीय है कि इस पूरे घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही है।  


ये भी जांच के दायरे में
 रंजीत लाल (महाप्रबंधक परिचालन):  इन पर लोगों को कंपनी में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी थी और दैनिक अधार पर वह निवेश की जानकारी मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन को देते थे।
सुदीप घोष दस्तीदार (मुख्य कार्यकारी मानव संसाधान) : कोष जुटाने में अहम भूमिका निभाई, सेन के जाल को फैलाने के लिए सॉफ्टवेयर सफारी डिजाइन की
अजितेश बनर्जी (मुख्य वित्त अधिकारी, एसआरआईएल) : अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर कंपनी के बही-खातों और वित्तीय लेने देन में हेरफेर करने की इजाजत सेन को दी
सुनील कुमाल गुप्ता रॉय (कानूनी लेखा परीक्षक) : कंपनी के खातों का परीक्षण न कर, सेन की ओर से मुहैया फर्जी बैलेंस शीट और कंपनी के बहीखाते पर हस्ताक्षर किए

घोटाले में इनकी भूमिका भी संदिग्ध
- रजत मजूमदार, पूर्व पुलिस महानिदेशक पश्चिम बंगाल
- देवब्रत सरकार, ईस्ट बंगाल क्लब के पूर्व सचिव
- कुणाल झुनझुनवाला, रेवलन कॉमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड के निदेशक


चेतावनी पर नहीं जागी सरकार
- 2006 : विभिन्न कंपनियों को मिलाकर मौजूदा सारदा समूह की स्थापना की गई
- 2009 : तत्कालीन सांसद सोमेंद्र नाथ मित्र और अबू हसीम खान चौधरी ने पहली बार कंपनी के कामकाज पर उठाया सवाल
- 7 दिसंबर 2012 : रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर डी सुब्बाराव ने राज्य सरकार से कंपनी की जांच करने सुझाव दिया
- 6 अप्रैल 2013 : सुदीप्त सेन ने सीबीआई को 18 पन्ने का पत्र लिखकर कहा कि उसने राजनीतिज्ञों को पैसे दिए हैं
- 23 अप्रैल 2013 : सेबी ने सारदा समूह से तत्काल कारोबार बंद करने और तीन महीने में निवेशकों का पैसा लौटाने को कहा

जांच के दायरे में सारदा
25 अप्रैल 2013 : आयकर विभाग और वाणिज्य मामलों के मंत्रलय ने अलग-अलग जांच शुरू की , प्र्वतन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया
9 मई 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने घोटाले का दायरा विभिन्न राज्यों में फैले होने की वजह से पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी
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काला करोबार
- 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है यह पूरा घोटाला
- 17 लाख से अधिक निवेशकों की गाढ़ी कमाई है दांव पर
- 05 राज्य (पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, झारखंड, ओडिशा, और असम) प्रभावित

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