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इंद्रा नूयी को नहीं मिली बिहार में जमीन

उद्योगों के लिए बिहार के पास जमीन नहीं है। भले ही राज्य में निवेश के लिए मुख्यमंत्री व जेडीयू सरकार कंपनियों को रिझाती रही हो लेकिन कई बड़ी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को प्लांट लगाने के लिए राज्य में जमीन ही नहीं मिल रही है। इसकी जानकारी विश्व व्यापार मेले में आए बिहार के उद्योग मंत्री व उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव ने दी।

कंपनियां पटना और इसके आसपास अपनी इकाईयां लगाने के लिए उत्सुक हैं। राज्य में निवेश को लेकर पेप्सीको, आईटीसी, वीडियोकॉन और फ्रांस की अलाना जैसी कंपनियों को निराशा हाथ लग चुकी है। उद्योग मंत्री भीम सिंह ने बताया कि राज्य में जनसंख्या घनत्व 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। जनसंख्या के हिसाब से जमीन की बेहद कमी है।

हालांकि राज्य में कृषि उत्पादों के चलते खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। फ्रांस और थाईलैंड जैसे देशों की आय का बडम स्रोत ऐसी इकाईयां ही हैं। राज्य सरकार लंबी लीज पर जमीन देने, सर्कल रेट पर जमीन खरीदने और अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की पहल कर रही है।

प्रमुख सचिव नवीन वर्मा ने बताया कि पर्याप्त जमीन मिलने पर उद्योगों के जरिए राज्य की आय सालाना दो हजार करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। अप्रवासी भारतीयों से अपनी जमीन मुहैया कराने और किसानों को अपनी जमीन बेचे बगैर उसमें निवेश की इजाजत देने की भी योजनाएं शुरू की गई हैं। 

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