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छोटी मछली, बड़ी मछली

पश्चिम बंगाल का शारदा चिट फंड घोटाला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के गले में फांस बनता जा रहा है। इस घोटाले के सिलसिले में जेल में बंद तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष की आत्महत्या की कथित कोशिश से इस घोटाले के नाटकीय तत्वों में इजाफा हो गया है। पूरी संभावना है कि यह कोशिश सिर्फ दिखावे के लिए की गई थी। तीन दिन पहले वह अदालत में घोषणा कर चुके थे कि उन्हें बली का बकरा बनाया जा रहा है और अगर तीन दिनों में कोई कार्रवाई नहीं की गई,  तो वह आत्महत्या कर लेंगे। वैसे आमतौर पर जो नींद की गोलियां उपलब्ध होती हैं,  उन्हें खाकर किसी का मरना बहुत ही मुश्किल है,  भले ही गोलियों की तादाद कितनी भी हो। यह संभावना भी नहीं है कि कुणाल घोष को बड़ी तादाद में नींद की गोलियां उपलब्ध हुई हों,  क्योंकि आत्महत्या की धमकी के बाद उन पर सख्त निगरानी रखी जा रही थी। कहा जा रहा है कि उन्होंने जेल अधिकारियों को गोलियां खाने के बारे में बताया और कहा कि उनकी तबीयत खराब हो रही है।

उन्हें बचा लिया गया,  अलबत्ता जेल के कुछ अधिकारियों को इस प्रसंग में निलंबन झेलना पड़ रहा है। यह कोशिश भले ही नाकाम रही हो, लेकिन देश में कई घोटालों में हत्याओं और आत्महत्याओं की घटनाएं आम हैं। पिछले दिनों गीतकार संतोष आनंद के बेटे ने भी एक घोटाले के सिलसिले में आत्महत्या कर ली थी। उत्तर प्रदेश के कुख्यात एनएचआरएम घोटाले में तो कई जानें जा चुकी हैं। जब घोटालों के तार दूर तक और ताकतवर लोगों तक फैले हों, तो ऐसा होना नामुमकिन नहीं है। शारदा चिट फंड घोटाला भी ऐसा ही है, जिसमें पश्चिम बंगाल में तमाम बड़े-बड़े नेता, फिल्म स्टार और अन्य प्रभावशाली लोगों की भागीदारी का संदेह है। कुणाल घोष शारदा चिट फंड के मीडिया समूह के सीईओ थे और जाहिर है,  उन्हें इसी वजह से तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में भेजा था। भंडाफोड़ होने के बाद सबसे पहले जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई,  उनमें कुणाल घोष हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं,  यहां तक कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। हो सकता है कि घोष अपने को बचाने के लिए कुछ बड़े नाम ले रहे हों,  क्योंकि यह शिकायत तो उन्हें है ही कि पार्टी ने अपना पल्ला छुड़ाने के लिए उनसे किनारा कर लिया है।

हो सकता है कि उन्हें यह लग रहा हो कि उनकी भंडाफोड़ की धमकी से बड़े लोग उन्हें बचाने की कोशिश करेंगे। यह आत्महत्या के प्रयास की खबर भी इसी तरह से लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश ही मालूम होती है। इस सबसे कुणाल घोष चर्चा में तो आ ही गए और तृणमूल कांग्रेस के बहुत सारे नेताओं के लिए मुश्किल भी पैदा हो गई है।

भारत में तमाम काले और संदिग्ध धंधे करने वालों का यह तरीका है कि वे काफी उदारता से धन बांटकर राजनेताओं, फिल्मी सितारों और अन्य रसूखदार लोगों को शामिल कर लेते हैं। न राजनेता, और न ही फिल्मी सितारे इस बात की तफ्तीश करते हैं,  जो धन उन तक आ रहा है, उसका जरिया क्या है?  इन बड़े लोगों की मौजूदगी से काले धंधे करने वालों को कानून से बचने का हथियार मिल जाता है और दूसरी ओर जनता में उनकी साख भी बन जाती है। जब घोटाले का भंडाफोड़ होता है,  तो नुकसान जनता का होता है,  नेता,  अभिनेता और दूसरे रसूखदार लोग हाथ झाड़कर अलग हो जाते हैं। यही शारदा घोटाले में हुआ है। ऐसे में,  कुणाल घोष को यह लगता है कि वह तो महज एक छोटी मछली हैं और बड़ी मछलियां जाल के बाहर हैं, तो यह स्वाभाविक है।

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  • Web Title:छोटी मछली, बड़ी मछली