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बेकार का विवाद

कांग्रेस द्वारा अपने कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी को न बुलाए जाने को लेकर पिछले कई दिनों से भाजपा के नेता और उसके समर्थक शोर मचाए हुए हैं कि यह प्रधानमंत्री का अपमान है। लेकिन मेरी नजर में यह वैधव्य-विलाप है। अव्वल तो जिस व्यक्ति ने कसम उठा रखी हो कि वह देश को कांग्रेस मुक्त करना चाहता है, उसे भला कैसे कांग्रेस पार्टी बुला सकती थी? फिर जिन जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती मनाई जा रही है, उनके राजनीतिक मूल्यों में ही नरेंद्र मोदी की कोई आस्था नहीं है, इस लिहाज से भी उन्हें न बुलाना ही तर्कसंगत कहलाएगा। आधुनिक भारत के इतिहास का थोड़ा-सा भी ज्ञान रखने वाला व्यक्ति इस हकीकत से वाकिफ होगा कि पंडित नेहरू विपक्ष को भरपूर सम्मान देते थे, क्या यही बात नरेंद्र मोदी के लिए कही जा सकती है? नरेंद्र मोदी ने अभी कुछ दिनों पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बलिदान दिवस पर उनकी उपेक्षा की थी और इसे देश ने देखा। दिल्ली में रहकर भी वह शक्ति स्थल पर देश की उस महान बेटी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने नहीं गए, जिसने न सिर्फ दुनिया में भारत का मान बढ़ाया, बल्कि देश की तरक्की के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। कांग्रेस का अपना कार्यक्रम है, उसे हक है कि वह अपने अतिथियों का चयन करे।
मिहिर सिंह, दाऊदपुर कोठी, एमआईटी, मुजफ्फरपुर, बिहार

यह कैसी बचत

मोदी सरकार का नारा है बचत करो। अब वही सरकार बड़े-बड़े समारोह करके दिखावा कर रही है। चाहे हरियाणा का शपथ-ग्रहण समारोह हो या मुंबई का। सवाल उठता है कि क्या जरूरत थी इतने मेहमानों और बड़ी तादाद में जनता को बुलाने की? एक कॉन्फ्रेंस रूम में सादगी से ये समारोह किया जा सकता था और इससे जनता के बीच एक स्वस्थ संदेश भी जाता।
जयश्री रोहतगी,  प्रियदर्शनी विहार,  लक्ष्मी नगर,  दिल्ली-92

बुजुर्गों की सुध लें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नागरिकों के लिए नई-नई योजनाओं की घोषणा करते रहते हैं। किंतु उन्होंने देश के वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य के बारे में कभी कुछ नहीं कहा, जबकि देश में बुजुर्गों की तादाद बढ़ती जा रही है। इन बुजुर्गों के बच्चे प्राय: प्राइवेट नौकरियों में लगे हैं, इसलिए वे उनका ध्यान कम ही दे पाते हैं। दवाइयों की कीमत और डॉक्टरों की फीस इतनी अधिक हो गई है कि साधारण वृद्ध इन खर्चों का वहन नहीं कर पाते हैं। ऐसे में,  सरकार ही उनका एकमात्र सहारा है। इसलिए सरकार को उनके स्वास्थ्य के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को, जिनकी उम्र 65 पार है,  एक हेल्थ कार्ड मिलना चाहिए,  तथा देश भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में इस कार्ड के आधार पर नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए।
ब्रज मोहन, पश्चिम विहार,  दिल्ली

बस चालकों की बदसलूकी

डीटीसी बसों में यात्रा करना कष्टकर एवं कठोर संघर्ष करना होता जा रहा है। काफी इंतजार के बाद जो बस आती है, उसमें इतनी भीड़ होती है कि दरवाजे से अंदर जाना मुश्किल होता है। आप दरवाजे पर अटके रहते हैं या फंसे रहते हैं, तभी ड्राइवर दरवाजे बंद करने लगता है। इस कारण बच्चे,  बुजुर्गों को चोट लगती है। हर ड्राइवर को दरवाजे पर भीड़ देखकर 10-15 सेकंड अधिक देरी से दरवाजे बंद करने चाहिए। ड्राइवरों से इसकी शिकायत करने पर वे बड़े अभद्र तरीके से बात करते हैं। इसी तरह परिचालक से बस नंबर आदि पूछने पर अप्रिय शब्द सुनने को मिलते हैं। इसलिए डीटीसी बस चालकों और परिचालकों को यात्रियों के साथ शिष्टाचार से पेश आने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
राजेंद्र सिंह रावत,  गाजियाबाद

संदर्भ सही नहीं

शुक्रवार को प्रकाशित कैलाश सत्यार्थी के ‘बचपन को बुराई से मुक्त करें’  शीर्षक अग्रलेख के सबहेड में जो आंकड़े प्रकाशित हुए हैं,  वे देश के नहीं, दुनिया भर के हैं। 
रोहित शर्मा,  ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर,  कालकाजी,  दिल्ली

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