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फिल्म रिव्यू: 6-5=2

फिल्म रिव्यू: 6-5=2

चौकिये मत, ये फिल्म का ही नाम है। जब किसी फिल्म का नाम (?) यानी प्रश्नचिह्न हो सकता है तो ये छह घटा पांच बराबर दो (6-5=2) क्यों नहीं हो सकता। फिल्म का ये नाम इसलिए है, क्योंकि ये छह दोस्तों की कहानी है, जिसमें पांच मर जाते हैं और एक बचता है। लेकिन यहां तो 2 लिखा है। बस यहीं पेंच है, जो फिल्म देख कर ही समझ में आएगा। ये कहानी है छह दोस्तों हर्ष (गौरव कोठारी), राजा (गौरव पासवाला), प्रिया (निहारिका रायजादा), भानु (अश्रुत जैन), सिद्धार्थ (प्रशांत गुप्ता) और सुहाना (दिशा कपूर) की। ट्रैकिंग के दौरान एक-एक पल भानु अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर रहा है।

रात में जब ये लोग एक जगह कैंप लगा कर रात गुजार रहे होते हैं तो कुछ अजीबो-गरीब घटनाएं होने लगती हैं। इन्हें वहां एक पेड़ दिखाई देता है, जिस पर ढेरों नरमुंड लटके होते हैं। इनमें से एक नरमुंड भानु अपने बैग में रख लेता है। अगले दिन आगे बढ़ने से पहले राजा की तबीयत खराब हो जाती है, इस वजह से इन्हें उसे वहीं छोड़ना पड़ता है। वापस लौटते समय बाकी पांच रास्ता भूल जाते हैं और फिर एक-एक कर रहस्यमय परिस्थितियों में इनकी मौत होने लगती है। इनके साथ क्या हुआ था, इसका राज खुलता है भानु के कैमरे से, जो इस पूरे घटनाक्रम के दौरान चालू था।

कॉन्सेप्ट के लिहाज से फिल्म अच्छी है। अंग्रेजी फिल्म ‘पैरानॉर्मल एक्टिविटी’ इस विषय पर बनी अब तक की सबसे सफल फिल्म मानी जाती है, लेकिन फाउंड फुटेज जॉनर पर आधारित इस फिल्म को देख कर बिल्कुल भी डर नहीं लगता। इसकी सबसे बड़ी वजह है फिल्म में किसी स्टोरी का न होना। एक ग्रुप की मौज-मस्ती अपील नहीं करती। उनका अभिनय किसी भी तरह से आकर्षित नहीं करता। फिल्म में सिनेमेटोग्राफी नाम की कोई चीज नहीं है। दरअसल, ये फिल्म पिछले साल कन्नड़ में इसी नाम से आई एक फिल्म का हिंदी रीमेक है। 30 लाख में बनी उस फिल्म ने 3 करोड़ से अधिक का बिजनेस किया था। पर ये फिल्म कितना बिजनेस करेगी, कहा नहीं जा सकता, क्योंकि इसे देखना सिर्फ पैसा वेस्ट करना है।


कलाकार: प्रशांत गुप्ता, अश्रुत जैन, गौरव पासवाला, गौरव कोठारी, दिशा कपूर, निहारिका रायजादा
निर्माता-निर्देशक: भरत जैन

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