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फिल्म रिव्यू: ब्यूटी एंड द बीस्ट

फिल्म रिव्यू: ब्यूटी एंड द बीस्ट

कुछ कहानियों का क्रेज कभी खत्म नहीं होता। खासतौर से परीकथाओं का। बचपन में कही-सुनी गई ये कहानियां बड़े होकर भी उस समय और रोचक लगती हैं, जब इन्हें आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किसी बड़े बजट की फिल्म के रूप में देखा जाए। फ्रेंच फिल्म ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ भी एक ऐसी ही फिल्म है, जो परीकथाओं की दिलचस्प कहानियों-घटनाओं का वर्णन करती है। ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’की कहानी को कई बार सिनेमाई पर्दे पर दिखाया जा चुका है, लेकिन ‘हैरी पॉटर’ व ‘लॉर्डस ऑफ द रिंग्स’ सिरीज की तरह इसका क्रेज भी बड़ों और बच्चों दोनों के सिर चढ़ कर बोलता दिखता है। कहानी शुरू होती है 1810 के फ्रांस से, जिसका एक सिरा जुड़ा है बेल (लि सैडॉक्स) से। दुख-सुख की धूप-छांव ङोलता बेल का परिवार अब एक छोटे से घर में आ सिमटा है। उसे अब भी इंतजार है उस बड़ी खुशी का, जिसके लिए उसका परिवार संघर्ष कर रहा है।

यही जद्दोजहद एक दिन बेल को एक बीस्ट (विंसेंट कासेल) यानी दंतकथाओं के राक्षस से मिलवाती है। बस, यहीं से उसकी जिंदगी बदलने लगती है। सपनों सरीखी दुनिया पाकर वो खुश तो रहती है, लेकिन कहीं न कहीं उसे बीस्ट के साथ अपने लगाव-अलगाव से परेशानी भी होने लगती है। उधर बीस्ट भी बेल के आने से एक अलग ही दुनिया का आनंद लेने लगता है। लेकिन परीकथाओं में हर बात सुनहरी नहीं होती। बेल के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ परीकथा होने के बावजूद पूरी तरह से बच्चों के लिए नहीं लगती। इसकी वजह है इसका कंटेंट और अत्याधुनिक स्पेशल इफेक्ट्स। बड़ों को भी ये फिल्म बांधे रख सकती है। कहानी वही है, लेकिन उसे स्पेशल इफेक्ट्स की मदद से रोचक बना दिया गया है। अगर आप सीजीआई तकनीक से सुसज्जित इस नए कलेवर को देखना चाहते हैं तो ये फिल्म बुरी नहीं है।

कलाकार: विंसेंट कासेल, लि सैडॉक्स, एंद्रे डस्सोलियर, डुराडो नॉरिगा
निर्देशक: क्रिस्टोफर गैंस
निर्माता: रिचर्ड ग्रैंडपियरे
संगीत: पियरे एडेनॉट 

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