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तारीफ और पैसा किसी भी सूरत में खराब नहीं लगते

तारीफ और पैसा किसी भी सूरत में खराब नहीं लगते

तीस साल से बॉलीवुड से जुड़े हैं। बीच में एक समय ऐसा आया था कि उन्हें फिल्में नहीं मिल रही थीं। अब फिर से वापसी की है, वह भी धमाकेदार! एक साथ नौ फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं व एक फिल्म ‘अभिनय चक्र’ का निर्माण। बातचीत में वह इसे समय का फेर व तकदीर का खेल बताते हैं।

सुना है ‘किल दिल’ करने को तैयार नहीं थे?

सच यही है। जब शाद अली ने नेगेटिव किरदार ऑफर किया तो मैंने मना कर दिया था, लेकिन मेरी पत्नी सुनीता ने कहा कि मुझे काम करना चाहिए। उसके बाद अब तक नौ फिल्में साइन कर चुका हूं।

लंबे समय बाद अभिनय में वापसी की है। एक साथ नौ फिल्में कर रहे हैं। आपको ये नई ऊर्जा कहां से मिल रही है?
सब मां की कृपा है, मगर आप इसे वापसी न कहें। मैं इंडस्ट्री से कहीं गया नहीं था। बस अच्छी फिल्मों के ऑफर नहीं मिल रहे थे। उधर मैंने राजनीति को अलविदा कहा, इधर फिल्मों ने मुझे अलविदा कह दिया। चार साल तक एक भी फिल्म का ऑफर नहीं मिला। पिता के किरदार तक का ऑफर नहीं मिला। अब मिल रहे हैं तो मुझे लगता है कि मेरा अच्छा समय वापस आ गया है। अब तो मैं ‘अभिनय चक्र’ फिल्म का निर्माण भी कर रहा हूं।

एक वक्त वह था,  जब आप एक साथ 49 फिल्में कर रहे थे?

वह जमाना अलग था। तब हम तीन-तीन शिफ्टों में काम करते थे। अब सिस्टम से काम हो रहा है। मेरे पास आज भी काफी फिल्मों के ऑफर आ रहे हैं। 

आपने ‘शानदार’ में आलिया भट्ट का पिता बनना अस्वीकार कर दिया था?

ऐसा नहीं है। एक तो वह स्क्रिप्ट नहीं दे रहे थे,  दूसरी तरफ मीडिया द्वारा मुझ पर दबाव बना रहे थे। तो सोचा कि दूर ही रहा जाए। मैं ‘जग्गा जासूस’ में रणबीर कपूर के पिता का किरदार निभा रहा हूं। मैं कलाकार हूं। जब तक अच्छे रोल मिलेंगे, करता रहूंगा।

आप नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ काम कर रहे हैं। उनके बारे में क्या कहेंगे?
यह पीढ़ी काफी मेहनती है। ये ज्यादा फिल्में नहीं करते, पर मेहनत करते हैं।

किसमें ज्यादा संभावना नजर आती है?
रणवीर सिंह। उसकी आंखों में मासूमियत है। शूटिंग के दौरान मुझसे काफी कुछ सीखने की कोशिश करता था। थियेटर के अंदर फिल्म ‘रामलीला’ देखते समय रणवीर और दीपिका के रोमांटिक सीन पर मैंने सीटियां बजाईं। बहुत दिनों बाद मैंने थियेटर में सीटी बजाई थी। मुझे लगा कि दोनों कलाकारों को जो काम मिला, उससे कहीं ज्यादा बेहतर करके उन्होंने दिखाया।

फराह खान, सैफ अली, प्रभु देवा सभी आपको अच्छा डांसर मानते हैं?
तारीफ और पैसा किसी भी सूरत में खराब नहीं लगते। मेरा डांस हर नृत्य निर्देशक को इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि मैं बिना बोले सब कर देता हूं। लोगों को लगता है कि गाने के बोल जो कहना चाहते हैं, जो रिदम चाहिए, वह बिना उनके कहे मैं करके दिखा देता हूं। मेरा मानना है कि डांस में भी ऐसे भाव आने चाहिए।

अब आपकी बेटी नर्मदा भी फिल्मों में आ रही है?
मेरा व मेरे परिवार का अच्छा समय आ गया है। हमारे घर में सब कुछ अच्छा हो रहा है। वह जिप्पी ग्रेवाल की फिल्म कर रही है। उसकी फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। मेरा मानना है कि बेटियों को अच्छा काम करने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए, उनके विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए। अभी तक मेरी बेटी ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जो मेरी समझ में ना आए। जिस दिन मुझे समझ में नहीं आएगा, उस दिन मैं सोचने की कोशिश करूंगा कि मेरी गलती कहां है।

आपको नहीं लगता कि सिनेमा से गांव, परिवार, अपनापन खत्म हो रहा है?
इसमें गलती फिल्मकारों की नहीं है, समाज ही बदल गया है। नई पीढ़ी गांव या कस्बों की बजाय महानगरों व विश्व के शहरों के बारे में सोचने लगी है।

वर्तमान की कॉमेडी पर क्या कहेंगे?
आज की कॉमेडी टीवी के परदे पर चली गई है। अब वहां हंसाने का काम ज्यादा हो रहा है।                   

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