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दिल्ली अकाली दल को भाजपा के साथ गठबंधन कायम रहने की उम्मीद

हरियाणा और महाराष्ट्र की तर्ज पर पंजाब में भी आने वाले समय में भाजपा के अलग होने संबंधी अटकलों की पृष्ठभूमि में शिरोमणि अकाली दल की दिल्ली इकाई ने आज कहा कि उसे पूरी उम्मीद है कि दोनों दलों का यह पुराना गठबंधन आगे भी बना रहेगा।

भाजपा-अकाली गठबंधन टूट सकने संबंधी खबरों पर अकाली दल की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने कहा कि सियासत में हर बात संभव है। परंतु भाजपा और अकाली दल का गठबंधन बहुत पुराना है। आज की तारीख में ऐसी कोई बात नजर नहीं आती है। भाजपा के बड़े नेताओं ने इसको स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई चीज नहीं होने जा रही है।

भाजपा और अकाली दल के बीच पंजाब में 1996 से गठबंधन है तथा दोनों दल अभी वहां सत्तारूढ़ हैं। इसके अलावा वे दिल्ली में साथ चुनाव लड़ते हैं। परंतु हाल के विधानसभा चुनाव में हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस तथा महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ भाजपा का 25 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि पंजाब के अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा अलग राह चुन सकती है।

जीके ने कहा कि मोदी लहर है और वह अपने दम पर केंद्र में सरकार लाए हैं। इसे कौन नकार सकता है। लेकिन जहां तक ये (गठबंधन टूटने की आशंका) सवाल है तो मुझे ऐसी बात नजर नहीं आती है।

उन्होंने कहा कि अकाली दल शायद देश की इकलौती पार्टी है जो एक समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है। वह एक सीमावर्ती राज्य में सत्तारूढ़ है। पंजाब में अगर किसी ने अलगाववाद और आतंकवाद को रोका हुआ है तो वह अकाली दल है। हमारी पार्टी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।

अकाली नेता जीके ने कहा कि आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के साथ पहले की तरह मिलकर चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार भाजपा ने 70 सदस्यीय विधानसभा में अकाली दल को चार सीटें दी थीं जिनमें से पार्टी राजौरी गार्डन और हरिनगर अपने चुनाव चिहन तथा कालकाजी एवं शाहदरा में भाजपा के चुनाव चिहन पर चुनाव लड़ी थी। राजौरी गार्डन, कालकाजी तथा शाहदरा में अकाली दल के उम्मीदवारों को जीत मिली थी।

जीके ने कहा कि हमें उम्मीद है कि पिछली बार जिस तरह से हम चुनाव लड़े थे उसी तरह इस बार भी लड़ेंगे तथा केंद्र की तरह दिल्ली में भाजपा-अकाली दल की सरकार बनेगी।

विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश किए जाने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला भाजपा को करना है। जहां तक अकाली दल के रूख का सवाल है तो हम यही कहना चाहते हैं कि भाजपा जिस चेहरे को भी आगे करेगी हम उसे स्वीकार करेंगे।

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