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गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा, भाकियू करेगी चक्काजाम

उत्तर प्रदेश में सरकार और गन्ना किसानों के बीच का गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कई महीनों से गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ाने की किसानों की मांग को प्रदेश सरकार ने खारिज कर दिया है। सरकार ने मौजूदा पेराई सत्र में गन्ना के मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की है। इससे प्रदेश के गन्ना किसानों में रोष है, वह खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

सरकार द्वारा मांग स्वीकार न करने पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने सरकार से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। साथ ही भाकियू नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसने गन्ने का समर्थन मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल नहीं किया तो, भाकियू 15 नवंबर से प्रदेशव्यापी चक्का जाम आंदोलन करेगी।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा, ‘‘पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने घोषणापत्र में किसानों को लागत में 50 प्रतिशत जोड़ कर लाभकारी मूल्य देने का वादा किया था, लेकिन प्रदेश सरकार के गन्ना मूल्य में वृद्धि न करने से साफ जाहिर होता है कि पार्टी ने वोट लेने के लिए किसानों से झूठा वादा किया था।’’ उन्होंने सपा पर किसानों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार चीनी उद्योग के घाटे का हवाला देते हुए मिल मालिकों को रियायतें दे रही है। वर्तमान समय में भी एक क्विंटल गन्ने से मिल मालिक को लगभग 300 रुपये की बचत होती है। इस मुद्दे पर भाकियू प्रदेश सरकार व मिल मालिकों से खुली बहस को तैयार है।’’

टिकैत ने कहा कि भाकियू की मांग है कि सपा सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और गन्ने का समर्थन मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल कर दे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार भाकियू की मांगों को नहीं मानती है तो वे 15 नवंबर को प्रदेशव्यापी चक्का जाम करेंगे।

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