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कुणाल घोष ने आत्महत्या की कोशिश की, खतरे से बाहर

कुणाल घोष ने आत्महत्या की कोशिश की, खतरे से बाहर

तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद एवं सारदा घोटाला मामले में आरोपी कुणाल घोष ने आज प्रेसीडेन्सी सुधार गृह में नींद की गोलियों का सेवन कर कथित तौर पर आत्महत्या करने की कोशिश की। सारदा घोटाले के सिलसिले में पिछले साल गिरफ्तार किए जाने के बाद से ही घोष प्रेसीडेन्सी सुधार गह में बंद हैं।
   
उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर सीबीआई ने घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेंगे।   
   
पश्चिम बंगाल सुधारगह सेवा मंत्री एच.ए. स्वाफी ने बताया कि घोष ने कहा कि उन्होंने नींद की गोलियों का सेवन किया है। उन्हें सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।
   
मंत्री ने बताया डॉक्टर को बुलाया गया जिन्होंने पाया कि सब कुछ सामान्य है। लेकिन ऐहतियात के तौर पर हमने कोई खतरा मोल नहीं लिया और उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसएसकेएम के निदेशक प्रदीप मित्रा ने बताया कि घोष की हालत खतरे से बाहर है।

जेल विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया उन्होंने (आत्महत्या करने की) धमकी दी थी इसलिए हम पिछले दो दिन से उन पर अतिरिक्त नजर रख रहे थे। उनके सोने से पहले हमने उनकी अच्छी तरह तलाशी ली थी। लेकिन तब कोई भी दर्दनाशक दवा या नींद की गोलियां उनके पास से नहीं मिली थीं।
   
अधिकारी ने बताया लेकिन देर रात दो बज कर करीब 30 मिनट के आसपास उन्होंने श्वास लेने में समस्या की शिकायत की और कहा उन्होंने गोलियों का सेवन किया है। इसके बाद जेल के डॉक्टरों को बुलाया गया तथा उनकी गहन जांच की गई लेकिन कुछ भी असामान्य नहीं पाया गया। फिर भी, हमने कोई खतरा मोल नहीं लिया।
   
कुणाल घोष को जब 10 नवंबर को शहर की एक अदालत में पेश किया गया था तब उन्होंने धमकी दी थी कि अगर घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ सीबीआई ने तीन दिन के अंदर समुचित कार्रवाई नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेंगे।   
   
तणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद ने यहां बैंकशाल अदालत में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरविंद मिश्रा के समक्ष कहा था जांच प्रभावित की जा रही है। यह स्वीकार्य नहीं है कि मैं जेल में सड़ता रहूं जबकि इसमें शामिल लोग खुलेआम घूमें। मैं तीन दिन का समय दे रहा हूं...अगर कार्रवाई नहीं की गई तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।
   
घोष ने न्यायाधीश के समक्ष कहा था मैं आपसे एक आदेश जारी करने की प्रार्थना करता हूं कि इन तीन दिनों के दौरान मेरे किसी भी संबंधी या मेरे वकील को मुझसे मिलने की अनुमति न दी जाए अन्यथा मैं प्रभावित हो जाऊंगा या रुक जाऊंगा।
   
इससे पहले, सुनवाई के दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कुछ शीर्ष नेताओं पर घोटाले से लाभान्वित होने का आरोप लगाया था। सारदा घोटाला मामले में आरोपी घोष के स्वास्थ्य पर डॉक्टर नजर रख रहे हैं।
   
पिछले साल 23 नवंबर को सीबीआई की विशेष अपराध शाखा ने घोष को गिरफ्तार किया था। केंद्रीय जांच एजेंसी की विशेष अपराध शाखा ने कहा कि वह जेल अधिकारियों से इस बाबत पूछताछ करेगी कि घोष को कहां बंद किया गया था और न्यायिक हिरासत में रहते हुए उन तक दवाईयां कैसे पहुंचीं।
   
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि यह गंभीर चिंता का मामला है और यह समझ पाना बेहद मुश्किल है कि घोष तक दवाईयां कैसे पहुंचीं और उन्होंने दवाईयों का सेवन कर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। सूत्रों ने कहा, हम निश्चित तौर पर जेल अधिकारियों को यह जानने के लिए लिखेंगे कि दवाईयां घोष तक कैसे पहुंचीं हम अदालत को भी इस बारे में सूचित करेंगे।
   
पेशे से पत्रकार और सारदा ग्रुप की कंपनी बंगाल मीडिया लिमिटेड के पूर्व कार्यकारी घोष को सीबीआई ने सारदा चिटफंड घोटाले में कथित संलिप्तता के लिए पिछले साल 23 नवंबर को गिरफ्तार किया था। वह, सारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके सहयोगी देवजानी मुखर्जी के साथ जेल में बंद हैं। सीबीआई द्वारा दायर प्राथमिक आरोप पत्र में कुणाल घोष का नाम है।
   
इससे पहले, अदालत में शुरुआती सुनवाई के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने बंगाल मीडिया की फाइलों पर या उन लोगों पर कार्रवाई नहीं की जिनके नाम उन्होंने बताए थे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर घोटाले से लाभान्वित होने का आरोप भी लगाया था।

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