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मेरे रहते नहीं लागू होगा कॉमन एक्टः एएमयू वीसी

मेरे रहते नहीं लागू होगा कॉमन एक्टः एएमयू वीसी

नव निर्वाचित छात्र संघ पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में कुछ लम्हे ऐसे आए जिनमें तल्खी साफ झलकी। वीसी जमीरुद्दीन शाह ने जहां साफ तौर पर कहा कि उनके रहते एएमयू में कामन एक्ट लागू नहीं हो सकता, वहीं छात्र नेताओं ने भी एमएचआरडी को निशाने पर लेते हुए यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक स्वरूप पर कोई समझौता न करने के संकेत दिए।

समारोह में वीसी ने लाइब्रेरी विवाद के बाद दिल्ली दौरे का जिक्र करते हुए कहा उनकी एएमयू में कामन एक्ट और कामन ऐंट्रेस टेस्ट को लेकर एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी से बात हुई थी। उस मुद्दे पर उन्होंने साफ कर दिया है कि वह इसे लागू नहीं करेंगे। यदि दवाब बनाया तो फिर एएमयू के लिए दूसरा वीसी तलाशना होगा लेकिन अपनी जारी रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि अभी केन्द्र में साढ़े चार साल भाजपा की सरकार है। यूनिवर्सिटी चलाने के लिए फंड की जरूरत होती है और फंडिग करना सरकार के ही हाथ में हैं। सरकार के साथ हमारा क्या रिलेशन हो यह हमें तय करना होगा। यदि यूनिवर्सिटी चलानी है तो हमें सरकार के साथ मिलकर चलना होगा।

छात्र संघ अध्यक्ष अब्दुल्ला अज्जाम ने कहा कि एएमयू पर कुछ लोगों की नजर है। वह किसी न किसी तरीके से इसके किरदार को खत्म करना चाहते हैं। वह एएमयू पर कामन यूनिवर्सिटी एक्ट लागू नहीं होने देंगे। इसके लिए छात्रों ने एक स्टडी ग्रुप बना लिया है। वह चाहते हैं कि इसमें कुछ शिक्षक भी हों। महसूस होता है कि केन्द्र में नई सरकार आने के बाद भगवाकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। छात्र संघ के उपाध्यक्ष सैयद मसूद-उल-हसन ने कहा कि एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप पर खतरा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोड आफ कंडक्ट को बदलने की बात नहीं कही
-समारोह के दौरान एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित वीसी के हवाले से छपी खबर पर छात्र संघ पदाधिकरियों ने उनसे स्थिति साफ करने को कहा। इस पर वीसी ने कहा कि उन्होंने महज बचिच्यों की तालीम के बदलाव की बात कही थी। कहा था कि वह तालीम को लेकर बदलाव कर रहे हैं। मुस्लिम कोड आफ कंडक्ट को बदलने की कोई बात नहीं कही गई। मैं मुसलमान हूं। ऐसी बात नहीं कर सकता।

रहमान को डीलिट देकर क्या हासिल किया
छात्र संघ पदाधिकारियों ने वीसी से चांसलर न होने के बाद भी डीलिट की उपाधि बांटने पर आपत्ति की। इस पर वीसी ने कहा कि उन्होंने केवल डीलिट की उपाधि उन्हें ही प्रदान की हैं जिन्होंने एएमयू के लिए कुछ दिया है। उनसे पहले एआर रहमान (प्रसिद्ध संगीतकार) को डीलिट की उपाधि दी गई, लेकिन उससे एएमयू को क्या फायदा हुआ।

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