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अमरोहा में चार घंटे के भीतर 78 महिलाओं की नसबंदी ऑपरेशन

स्वास्थ्य महकमे के अफसर नसबंदी लक्ष्य पूरा करने के लिए मरीजों की जान पर खेल रहे हैं। धनौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार घंटे के भीतर 78 महिलाओं की नसबंदी ऑपरेशन ने छत्तीसगढ़ में हुई घटना को याद दिला दिया। एक दिन में 30 नसबंदी आपरेशन होने चाहिए, लेकिन यहां बिल्कुल जुदा हुआ। महज 3 मिनट 45 सेकेंड में एक महिला की नसबंदी से अंदाजा लगा सकते हैं कि चिकित्सक ने तसल्ली से काम किया या फिर तेजी से। आपरेशन के बाद महिला मरीजों को घर भेज दिया गया। ताज्जुब इस बात का है कि खुद महकमे के मुखिया ने अपनी अगुवाई में इस काम को अंजाम दिया ।


गुरुवार को सीएचसी धनौरा में नसबंदी ऑपरेशन शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें दूरदराज के गांवों व शहर की महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। इन महिलाओं को आशा व एएनएम लेकर आईं। दोपहर करीब 12 बजे मुख्य चिकित्सा अधिकारी अस्पताल में पहुंची और अन्य स्टाफ के साथ उन्होंने नसबंदी ऑपरेशन की कार्रवाई शुरू की।


साढ़े चार बजे तक 78 महिलाओं के ऑपरेशन कर डाले। आपरेशन के बाद महिलाओं को वार्ड में भर्ती कराया और कुछ देर बाद महिलाओं को एक-एक करके उन्हें उनके घर भेज दिया गया।
हैरानी की बात ये है कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेंडारी में डाक्टरों द्वारा छह घंटे में 83 महिलाओं की नसबंदी और उसके बाद हालत बिगड़ने से 13 की मौत के बाद भी सेहत महकमे के अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया। थोड़े समय में हुए इतने अधिक नसबंदी ऑपरेशन को लेकर हर कोई हैरानी में है। मानक की बात करें तो दिन में केवल 30 ही ऑपरेशन डाक्टर द्वारा किए जा सकते हैं, लेकिन यहां तो उनकी धज्जियां खुद सीएमओ ने उड़ा डालीं।


 डाक्टर नहीं हैं, इसलिए मैं खुद नसबंदी ऑपरेशन कर रही हूं। एक दिन में शिविर लगता है। संख्या अधिक हो जाती है। किसी को कोई तकलीफ नहीं हुई। सभी ऑपरेशन सफल हुए हैं। हां, मानक 30 का है, लेकिन डाक्टर न होने के कारण मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है।
 डॉ. मंजू वैश्य शर्मा, सीएमओ

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