DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जाम में फंसे ट्रैफिक की राह बनाते हैं आसान

अस्सी बरस का यह ‘जांबाज सिपाही’ शहर के लिए नजीर है। शहर के ट्रैफिक का दर्द इन्होंने समझा। व्यवस्था को कोसने के बजाय खुद ढूंढ निकाला इसका मरहम। उम्र के इस पड़ाव में भी आज भी वह अपनी टीम के साथ ट्रैफिक कंट्रोलर के मोर्चे पर डटे हुए हैं। भले ही ट्रैफिक कंट्रोल के लिए पूरा महकमा ही क्यों न हो, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस बुजुर्ग ने अपनी जिम्मेदारी समङी। जाम में फंसे लोगों को राह दिखाने का बीड़ा उठाया। जहां भी ट्रैफिक फंसता यह तुरंत ट्रैफिक कंट्रोलर की भूमिका में उतर पड़ते। मदद करती है उनके द्वारा गठित की गई टीम।

हम बात कर रहे हैं रामगंगा विहार निवासी रामौतार गुप्ता की। कटरानाज में उनकी घी-तेल की दुकान है। परिवार में चार बच्चे ममता, अनीता, विनीता व नवल किशोर है। सभी की शादी हो चुकी है। समाज सेवा उनके दिल में रची बसी हुई है। दुकान संभालने की जिम्मेदारी बेटे को सौंप दी। सुबह शाखा में जाना कभी नहीं भूलते। ठीक साढ़े नौ बजे स्कूटी से घर से निकल पड़ते। जिधर सड़क पर जाम देखा वहां स्कूटी अपने आप ही रुक जाती है। जाम विकराल हुआ तो उनकी एक कॉल पर टीम के सदस्य मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में जुट जाते। पुलिस के अधिकारी उन्हें ट्रैफिक कंट्रोलर बाबा के नाम से जानते हैं। जिले में रहने वाला शायद ही कोई ऐसा आईपीएस अधिकारी हो जिसने रामौतार गुप्ता को सम्मानित न किया हो। बाजार जाते वक्त पत्नी यदि साथ होती हैं तो दोनों लोग जाम खुलवाने में जुट जाते हैं। यातायात माह में प्रमुख चौराहों पर निस्वार्थ भाव से ट्रैफिक कंट्रोल करते आसानी से देखा जा सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जाम में फंसे ट्रैफिक की राह बनाते हैं आसान